अमरोहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत ऐतिहासिक तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर मेले को आपस में जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। आगामी कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय स्नान मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन को लेकर अमरोहा और हापुड़ जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेले में प्रतिवर्ष पहुंचने वाले 35 से 40 लाख श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अमरोहा के जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ और हापुड़ की जिलाधिकारी कविता मीणा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक तिगरी में आयोजित की गई।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तिगरी मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद, वे पिछले दो वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा मेले की विधिवत पूजा-अर्चना में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान वे दोनों जनपदों के मेलों को आपस में जोड़ने के निर्देश भी दे चुके हैं, तथा हाल ही में गजरौला जनसभा के दौरान भी उन्होंने इस योजना का विशेष रूप से उल्लेख किया था।

मुख्यमंत्री के इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए दोनों जिलों के अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया और तिगरी व गढ़मुक्तेश्वर के बीच गंगा नदी पर एक अस्थायी पैंटून (पीपे का) पुल बनाए जाने की संभावनाओं पर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-09 पर बृजघाट पुल के निर्माण से पूर्व सदियों से तिगरीधाम व गढ़मुक्तेश्वर के बीच इसी पैंटून पुल से व्यापार और आम जनमानस का आवागमन होता था।

पैंटून पुल की तकनीकी व्यवहार्यता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग मेरठ व मुरादाबाद के अधीक्षण अभियंताओं सहित वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।

अमरोहा के जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि वर्तमान में पुल निर्माण की अध्ययन प्रक्रिया जारी है, जिसमें तिगरी की ओर एंकरिंग प्वाइंट उपलब्ध हैं जबकि गढ़मुक्तेश्वर की ओर एंकरिंग प्वाइंट तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तकनीकी टीम को सेफ्टी रिपोर्ट व एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे जल्द ही शासन को स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होने के बाद लगभग एक से डेढ़ महीने में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

बैठक में केवल यातायात प्रबंधन ही नहीं, बल्कि गंगा नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने हेतु ड्रेजिंग, तटबंध निर्माण, तथा स्थायी पक्के घाटों व स्नान स्थलों के विकास पर भी व्यापक चर्चा हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अमरोहा गरिमा सिंह, एडीएम हापुड़, एसडीएम धनौरा सहित सिंचाई, लोनिवि, वन विभाग और जिला पंचायत के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे/INN DESK
