अमरोहा,17 अगस्त ( संवाददाता) अमरोहा में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने जलनिकासी व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपये का सरकारी बजट खर्च होने के बावजूद जिले की सड़कें, बाजार और आवासीय क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ खंड के मुख्य नाले और नगर की जल निकासी को जोड़ने वाली स्टेट हाईवे-51 की महत्वपूर्ण पुलिया लंबे समय से बंद पड़ी है, जिसके कारण बारिश का पानी समय पर निकल नहीं पा रहा है।
कलाली मार्ग समेत प्रमुख बाजार क्षेत्रों में अधूरे निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, जमा कीचड़ और बहता गंदा पानी नागरिकों, स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। नाला सफाई और जलनिकासी व्यवस्था के नाम पर हुए भारी-भरकम खर्च की गुणवत्ता और उसकी धरातलीय निगरानी पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

बारिश के उपरांत मंडी धनौरा के व्यापारिक क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर व्यापक जलभराव से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वर्तमान में कांवड़ यात्रा और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सड़कों पर आवाजाही काफी बढ़ गई है, लेकिन फुटपाथों का अभाव और रास्तों पर भरा पानी हादसों के खतरे को लगातार बढ़ा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार स्थिति से अवगत कराया गया, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
व्यवस्था की इस घोर उपेक्षा से नाराज एडवोकेट अनुराग और सेवानिवृत्त सैनिक मनोज सिंह सहित कई जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि अमरोहा में जलभराव की समस्या महज नालों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई ढांचागत कारण जिम्मेदार हैं। बिना समुचित निकासी योजना के विकसित हो रही अवैध कॉलोनियां, नालियों व सीवर नेटवर्क में ठोस कचरे का लगातार जमाव और बार-बार सड़कों का स्तर ऊंचा किया जाना इस संकट को और अधिक भयावह बना रहा है।

बिना पुरानी सतह की छिलाई किए हर बार सड़क की ऊंचाई बढ़ा देने से आसपास निर्मित मकानों और दुकानों के फर्श नीचे रह जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप बारिश का दूषित पानी सीधे लोगों के घरों में घुस जाता है, जिससे दीवारों में सीलन आने और आवागमन अवरुद्ध होने का स्थाई खतरा बना रहता है। इस तरह की दोषपूर्ण निर्माण शैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पूर्व में अमरोहा दौरे के दौरान प्रदेश के तात्कालिक नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से पत्रकार वार्ता में जब इस कार्यप्रणाली पर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने मामले को अति गंभीर मानते हुए सड़क का स्तर अनावश्यक ऊंचा करने की प्रथा पर रोक लगाने और नई नीति बनाने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर पुराने ढर्रे पर काम जारी रहने से प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

समस्या के स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञों ने एक समग्र कार्ययोजना पर तुरंत अमल करने का सुझाव दिया है। इसके तहत सबसे पहले मुख्य नालों की वैज्ञानिक विधि से नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, स्टेट हाईवे-51 की बंद पुलिया समेत सभी अवरुद्ध निकासी मार्गों को युद्धस्तर पर खोलना अनिवार्य है। साथ ही पूरे शहर के जलनिकासी नेटवर्क का नए सिरे से तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए और भविष्य में सड़क निर्माण के दौरान वैज्ञानिक मानकों के तहत सतह की ऊंचाई निर्धारित की जाए।
इसके साथ ही आम जनता को भी सजगता दिखाते हुए नालियों में प्लास्टिक व ठोस कचरा न फेंकने और अवैध निर्माण से बचने की सख्त आवश्यकता है। मानसून की हर पहली बारिश में जलभराव के इस पुराने ढर्रे को देखते हुए अब यही सबसे बड़ा सवाल है कि नगर को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाने वाली स्थायी योजना धरातल पर कब तक उतर पाएगी/INN DESK
