ईरान में पिछले 13 दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा का स्तर लगातार बढ़ रहा है। मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 62 से लेकर 200 लोगों तक के मारे जाने की खबर है। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। यह अशांति 28 दिसंबर 2025 को आर्थिक बदहाली और महंगाई के खिलाफ शुरू हुई थी, लेकिन अब यह 180 से अधिक शहरों और सभी 31 प्रांतों में फैल चुकी है। प्रदर्शनकारी अब “तानाशाह की मौत” के नारे लगा रहे हैं और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार को हटाने की मांग कर रहे हैं।
देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार ठप
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ईरानी अधिकारियों ने 8 जनवरी 2026 की रात से पूरे देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks ने पुष्टि की है कि देश की कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के मात्र 1% तक गिर गई है। सरकार ने मोबाइल नेटवर्क एंटेना और फोन लाइनों को भी निष्क्रिय कर दिया है ताकि प्रदर्शनकारी आपस में संपर्क न कर सकें और हिंसा की खबरें बाहर न जा सकें।
हवाई सेवाओं पर असर और उड़ानों का रद्दीकरण
अशांति और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण ईरान का संपर्क दुनिया के अन्य हिस्सों से कट गया है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। Turkish Airlines ने भी इस्तांबुल से तेहरान के लिए अपनी 5 उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसके अलावा Pegasus Airlines और कतर की एयरलाइंस ने भी अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं।
वैश्विक चेतावनी और ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने धमकी दी है कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है या उनकी हत्या करती है, तो अमेरिका “वहाँ वार करेगा जहाँ सबसे ज्यादा दर्द होगा”। दूसरी ओर, ईरानी सरकार ने इन हिंसक प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल के “आतंकवादी एजेंटों” को जिम्मेदार ठहराया है और प्रदर्शनकारियों को कड़ी सजा देने की बात कही है।
