महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के खिलाफ साल 2021-22 के दौरान रची गई कथित साजिश की जांच में अब नए और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
साजिश का मुख्य केंद्र: अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाला
एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को ULC घोटाले के एक पुराने मामले में घसीटने की योजना बनाई गई थी।
पूर्व DGP संजय पांडे की भूमिका
रिपोर्ट में पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
दबाव की राजनीति: आरोप है कि पांडे ने ठाणे पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे फडणवीस और शिंदे के खिलाफ झूठे सबूत जुटाएं।
“केस बनाओ और अरेस्ट करो”: पेन ड्राइव में मौजूद ऑडियो क्लिप के आधार पर दावा किया गया है कि संजय पांडे ने तत्कालीन DCP लक्ष्मीकांत पाटिल से कहा था कि किसी भी तरह मामला दर्ज कर दोनों नेताओं को गिरफ्तार किया जाए।
बिल्डर पर दबाव: ठाणे के एक व्यापारी श्यामसुंदर अग्रवाल पर दबाव डाला गया था कि वह फडणवीस और शिंदे के खिलाफ बयान दे, जिसके बदले में उसके खिलाफ चल रहे केसों को खत्म करने का लालच दिया गया था.
SIT की कार्रवाई और सिफारिशें
मुंबई के जॉइंट सीपी सत्यनारायण चौधरी के नेतृत्व में गठित 4 सदस्यीय SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली है:
3 अधिकारियों पर केस की सिफारिश: SIT ने पूर्व DGP संजय पांडे, तत्कालीन ACP सरदार पाटिल और इंस्पेक्टर मनोहर पाटिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
पेन ड्राइव बम: बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर द्वारा विधानसभा में पेश की गई एक पेन ड्राइव, जिसमें स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो और ऑडियो क्लिप थे, को जांच का मुख्य आधार बनाया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
देवेंद्र फडणवीस: उन्होंने पहले ही कहा था कि उन्हें जेल भेजने का “टारगेट” पुलिस अधिकारियों को दिया गया था, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुए क्योंकि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया था।
संजय पांडे का पक्ष: पूर्व DGP ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है और एफआईआर रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
विपक्ष (MVA): उद्धव ठाकरे गुट और अन्य विपक्षी दलों ने इन आरोपों को निराधार बताया है और इसे एजेंसियों का दुरुपयोग करार दिया है.
