प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित स्वाभिमान पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में सहभागिता की। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई, जो शौर्य, साहस और त्याग का प्रतीक है। इसके उपरांत प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और बाद में जनसभा को संबोधित किया।
शौर्य सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज देश के हर कोने से लाखों लोग इस कार्यक्रम से जुड़े हैं और सभी को उन्होंने “जय सोमनाथ” के उद्घोष के साथ शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव सभी कुछ अद्भुत है। एक ओर देवाधिदेव महादेव का सान्निध्य है, तो दूसरी ओर समुद्र की उठती लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और आस्था का अपार प्रवाह है। इस दिव्य माहौल में भगवान सोमनाथ के भक्तों की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी भव्य व अलौकिक बना दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक अनेक आक्रांताओं ने सोमनाथ पर आक्रमण किए और उन्हें यह भ्रम रहा कि उनकी तलवारें सनातन सोमनाथ को पराजित कर देंगी। लेकिन उन्होंने यह नहीं समझा कि जिस सोमनाथ को वे मिटाने चले थे, उसके नाम में ही ‘सोम’ अर्थात अमृत का भाव निहित है। इसमें वह विचार समाया है, जो हलाहल का पान कर भी अमर रहने की प्रेरणा देता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ में सदाशिव महादेव के रूप में वह चेतन शक्ति प्रतिष्ठित है, जो एक ओर कल्याणकारी है तो दूसरी ओर प्रचंड तांडव के रूप में अपार सामर्थ्य का स्रोत भी है। सोमनाथ पर आक्रमण करने वाले गजनी से लेकर औरंगजेब तक सभी आक्रांता इतिहास के सीमित पन्नों में सिमटकर रह गए, जबकि चिरंतन और सनातन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर तट पर उसी दृढ़ता और गौरव के साथ खड़ा है।
