सरकार ने डिलीवरी कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अहम कदम उठाया है। श्रम मंत्रालय ने 10 मिनट में डिलीवरी की व्यवस्था पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस मुद्दे को लेकर मंत्रालय ने स्विगी और जोमैटो समेत देश की प्रमुख ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों से बातचीत भी की।
इस संबंध में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और डिलीवरी के लिए तय समय-सीमा हटाने पर जोर दिया। सभी कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया कि वे अपने ब्रांड प्रचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से “10 मिनट डिलीवरी” का दावा हटाएंगी। इसके बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड कम्युनिकेशन से 10 मिनट में डिलीवरी का उल्लेख हटा दिया है।
1. सरकार का सख्त रुख और हस्तक्षेप
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में Blinkit, Zepto और Zomato जैसी कंपनियों के नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। सरकार ने स्पष्ट किया कि “10-मिनट” जैसी सख्त समय सीमा डिलीवरी पार्टनर्स पर अनुचित दबाव डालती है, जिससे सड़क सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है।
2. डिलीवरी राइडर्स का राष्ट्रव्यापी आंदोलन
दिसंबर 2025 के अंत और 1 जनवरी 2026 के दौरान देशभर में लगभग 2 लाख से अधिक डिलीवरी राइडर्स ने हड़ताल की। उनकी मुख्य मांगें थीं:
- 10-मिनट मॉडल का अंत: राइडर्स का कहना है कि इस दबाव में वे ट्रैफिक नियम तोड़ने और दुर्घटनाओं का शिकार होने को मजबूर हैं।
- न्यूनतम वेतन: उन्होंने प्रति किलोमीटर ₹20 की दर और मासिक कम से कम ₹24,000 की कमाई की गारंटी मांगी।
- सामाजिक सुरक्षा: बीमा, स्वास्थ्य कवरेज और काम के निश्चित घंटों की मांग की गई।
3. राघव चड्ढा का “डिलीवरी बॉय” बनकर विरोध
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाया। 12 जनवरी 2026 को उन्होंने खुद एक दिन के लिए Blinkit डिलीवरी एजेंट की वर्दी पहनी और ऑर्डर डिलीवर किए ताकि वे इस काम की जमीनी हकीकत समझ सकें। उन्होंने 10-मिनट मॉडल को “आधुनिक शोषण” करार दिया और इसे तुरंत प्रतिबंधित करने की मांग की।
4. कंपनियों की सफाई और बदलाव
विवाद बढ़ने के बाद Zomato और Blinkit के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने स्पष्ट किया कि:
- विज्ञापन में बदलाव: कंपनियां अब “10-मिनट” की आक्रामक मार्केटिंग बंद करेंगी और “सुरक्षित और तेज” डिलीवरी पर ध्यान देंगी।
- तकनीकी सफाई: गोयल का दावा है कि डिलीवरी की गति राइडर्स को तेज चलाने के लिए कहने से नहीं, बल्कि “डार्क स्टोर्स” की घनी संख्या (Store Density) से आती है।
- बिना टाइमर वाला ऐप: उन्होंने बताया कि राइडर्स के ऐप पर कोई काउंटडाउन टाइमर नहीं होता, जिससे उन्हें समय का तनाव न हो।
5. भविष्य का मॉडल (Quick-Commerce 2.0)
विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह सेक्टर 20-30 मिनट के अधिक टिकाऊ (Sustainable) मॉडल की ओर बढ़ेगा। कंपनियां अब केवल गति के बजाय ग्राहकों को “सुविधा” और “विविधता” (जैसे Blinkit का नया ‘Post-Order’ फीचर जहां ऑर्डर के बाद भी सामान जोड़ा जा सकता है) देने पर ध्यान दे रही हैं।
