प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधिकारिक कार्यालय (PMO) आज, 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) को ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से नए और आधुनिक परिसर में शिफ्ट हो गया है। इसे ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth) नाम दिया गया है, जो प्रधानमंत्री के ‘प्रधान सेवक’ होने के विजन को दर्शाता है।
1. नए पीएमओ (सेवा तीर्थ) की विस्तृत जानकारी
- लोकेशन: यह परिसर नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड (पुराना नाम डलहौजी रोड) पर स्थित है। यह रायसीना हिल्स के पास सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
- परिसर की संरचना:सेवा तीर्थ परिसर में तीन मुख्य इमारतें हैं:
- सेवा तीर्थ-1: इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्थित है।
- सेवा तीर्थ-2: यहाँ कैबिनेट सचिवालय (Cabinet Secretariat) कार्य करेगा।
- सेवा तीर्थ-3: यहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय होगा।
- लागत और क्षेत्रफल: इस पूरे ‘एग्जीक्यूटिव एनक्लेव’ को लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है, जो 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला है।
- आधुनिक सुविधाएँ: यह बिल्डिंग पूरी तरह पेपरलेस है और इसमें हाई-टेक सुरक्षा के लिए बुलेट-प्रूफ ग्लास और आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं।
2. ‘मोदी दशक’ में बदले गए बड़े पते और नाम (2014-2026)
बीते 11 वर्षों में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और भारतीय संस्कृति के सम्मान के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- कर्तव्य पथ और कर्तव्य भवन: ‘राजपथ’ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का नाम कर्तव्य भवन किया गया है।
- लोक कल्याण मार्ग: 2016 में प्रधानमंत्री आवास ‘7, रेस कोर्स रोड’ का नाम बदलकर ‘7, लोक कल्याण मार्ग’ किया गया।
- लोक भवन और लोक निवास: 2024-25 में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के ‘राज भवन’ का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ और केंद्र शासित प्रदेशों के ‘राज निवास’ का नाम ‘लोक निवास’ करने का निर्देश दिया।
- अमृत उद्यान: राष्ट्रपति भवन के ‘मुगल गार्डन’ का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया।
- प्रयागराज और अयोध्या: इलाहाबाद को प्रयागराज और फैजाबाद को अयोध्या नाम दिया गया।
- स्टेशन और द्वीप: ‘मुगलसराय’ जंक्शन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और अंडमान के ‘रॉस द्वीप’ का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखा गया।
3. भविष्य की योजना: युगे युगीन भारत संग्रहालय
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक, जहाँ 1947 से प्रधानमंत्री कार्यालय और महत्वपूर्ण मंत्रालय थे, उन्हें अब खाली कर दिया गया है। इन ऐतिहासिक इमारतों को अब युगे युगीन भारत संग्रहालय में बदला जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय होगा।
