मुरादाबाद। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कर्म योग संस्थान ने मिलन विहार स्थित वृद्ध जन आवास (वृद्ध आश्रम) में बुजुर्गों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 12 वॉकर वितरित किए। यह आयोजन न केवल एक सहायता कार्यक्रम रहा, बल्कि समाज में वृद्धजनों के सम्मान और उनके प्रति जिम्मेदारी का सशक्त संदेश भी बना।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (समाज कल्याण विभाग) एल. वेंकटेश्वर लू की धर्मपत्नी श्रीमती फणि लू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने वृद्धजनों से आत्मीय संवाद किया, उनके अनुभवों को सुना और उनके साथ समय बिताया।

उन्होंने कहा कि “वृद्धजन समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान की चिंता करना हम सभी का दायित्व है। कर्म योग संस्थान का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है।”
श्रीमती फणि लू ने भविष्य में भी वृद्धजनों की सेवा से जुड़े कार्यों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम के दौरान कर्म योग संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती पिंकी दुमीर, प्रबंधक मनोज दुमीर तथा कोषाध्यक्ष करन दुमीर ने मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान द्वारा संचालित सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान का उद्देश्य समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्गों—विशेषकर वृद्धजनों—को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में सहयोग करना है।

इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग, मुरादाबाद मंडल के उपनिदेशक मोहम्मद मुश्ताक अहमद सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कर्म योग संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार और समाज के बीच ऐसे संस्थान सेतु का कार्य करते हैं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को धरातल पर मजबूती प्रदान करते हैं।
वॉकर प्राप्त कर वृद्धजनों के चेहरों पर संतोष और खुशी स्पष्ट रूप से झलकती दिखाई दी।

कई बुजुर्गों ने इसे अपने दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम के अंत में आश्रम प्रबंधन ने कर्म योग संस्थान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल बुजुर्गों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपिका दुमीर, मोहित आनंद सहित कर्म योग संस्थान के अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

मकर संक्रांति जैसे पावन पर्व पर किया गया यह सेवा कार्य सामाजिक समरसता, करुणा और कर्तव्यबोध का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
