मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पठन-पाठन को आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से संचालित ‘निपुण भारत मिशन’ के क्रियान्वयन में जनपद मुरादाबाद ने प्रदेश स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने आंकड़ों का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि ‘निपुण प्लस’ ऐप के जरिए किए गए मूल्यांकन में मुरादाबाद जनपद ने लंबी छलांग लगाई है। कभी 9 प्रतिशत पर रहने वाला जिला अब 78 से 79 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज करते हुए उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 8 के विद्यालयों में 8वें स्थान पर और प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर 9वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पूरे मुरादाबाद मंडल में जिले ने प्रथम स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी ने इस सफलता को शिक्षा विभाग, सीडीओ, बीएसए, एसआरजी, एआरपी, शिक्षक संकुलों और शिक्षकों के साझा प्रयासों और सटीक रणनीति का परिणाम बताया।
9 से 79 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक छलांग और 100 फीसदी डिजिटल ट्रैकिंग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई के आंकड़ों में जनपद का निपुण मूल्यांकन स्तर महज 9 प्रतिशत था। पूर्व जिलाधिकारी के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मई और जुलाई में योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया। इसके तहत कक्षा 1 से 5 में हिंदी, गणित व ईवीएस तथा कक्षा 6 से 8 में विज्ञान विषय के शिक्षण को निपुण प्लस एप से जोड़ा गया। न्याय पंचायत स्तर पर शिक्षक संकुलों की नियमित समीक्षा की गई और शून्य अथवा बेहद कम उपयोग करने वाले शिक्षकों व संकुलों से प्रत्येक 3 दिन में संपर्क साधकर हैंडहोल्डिंग की गई। इस मॉनिटरिंग का नतीजा रहा कि जनपद का प्रदर्शन 79 प्रतिशत तक पहुंच गया। आज जिले के सभी शिक्षकों के पास विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम का 100 प्रतिशत वास्तविक डाटा उपलब्ध है, जिसका उपयोग बच्चों की दक्षता सुधारने में किया जा रहा है।
बाल मनोविज्ञान पर केंद्रित ‘क-ख-ग-घ’ मॉडल बना बुनियादी शिक्षा की रीढ़
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे अनुकरण और व्यावहारिक गतिविधियों से अधिक सीखते हैं। इसी बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए जिले में विशेष ‘क-ख-ग-घ’ मिशन शुरू किया गया है। इसमें ‘क’ से कहानी और कल्पनाशीलता, ‘ख’ से खेल और खिलौने, ‘ग’ से गीत और गतिविधि तथा ‘घ’ से घनिष्ठता और घर जैसा आत्मीय वातावरण शामिल है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में आधारभूत ढांचे को 19 बिंदुओं पर संतृप्त (सैचुरेट) कर भौतिक गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है, जबकि निपुण भारत मिशन के तहत गुणवत्तापरक शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है ताकि ज्ञान बच्चों के मन में स्थायी रूप ले सके।
हाजिरी बनी सामान्य ज्ञान का मंच, गणित व सामाजिक विषयों के लिए प्रोजेक्ट फाइलें
प्रेस वार्ता में उपस्थित राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त महिला शिक्षक ने अपने विद्यालय स्तर पर किए गए शैक्षणिक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘बिल्डिंग एज ए लर्निंग एड’ (बाला) की तर्ज पर विद्यालय की दैनिक उपस्थिति को ‘लर्निंग आउटकम’ से जोड़ा गया है। कक्षा 6 के छात्र-छात्राओं को राज्यों के नाम आवंटित किए गए हैं, जिसमें शिक्षक द्वारा राज्य का नाम बोलने पर छात्र संबंधित राजधानी (जैसे ‘उत्तर प्रदेश’ पर ‘लखनऊ प्रेजेंट’) बोलकर उपस्थिति दर्ज कराते हैं। कक्षा 7 व 8 के विद्यार्थियों के लिए एशिया महाद्वीप के देशों और उनकी राजधानियों को इस प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, गणित विषय में प्राकृतिक व पूर्ण संख्याओं से लेकर संख्या रेखा, भिन्न और प्रतिशत तक के सिद्धांतों को खेल-खेल में सिखाने के लिए प्रोजेक्ट फाइलें तैयार कराई गई हैं। इसी माह से सामाजिक विज्ञान और सामान्य ज्ञान के व्यावहारिक ज्ञान हेतु भी प्रोजेक्ट फाइल आधारित प्रणाली लागू की गई है।
15 पीएम-श्री के साथ 15 नए ‘मुरादाबाद-श्री’ विद्यालय होंगे विकसित, लक्ष्य प्रदेश में नंबर-1
जनपद को प्रदेश में शीर्ष स्थान (नंबर-1) पर पहुंचाने की कार्ययोजना साझा करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार की ‘पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम-श्री) योजना के अंतर्गत चिन्हित जिले के 15 विद्यालयों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के फंड कन्वर्जेंस से 15 अतिरिक्त विद्यालयों को ‘मुरादाबाद-श्री’ के रूप में तैयार किया जाएगा। इस प्रकार जिले में कुल 30 लीडरशिप मॉडल स्कूल विकसित होंगे, जो निजी स्कूलों के समकक्ष शिक्षण मानक स्थापित करेंगे और अन्य सभी सरकारी स्कूलों के लिए पथ-प्रदर्शक बनेंगे@शांतनु/INN
