मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल के सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक चेतना को समर्पित भव्य आयोजन ‘उदीषा: चौपाला साहित्योत्सव–2026’ का आयोजन 22 से 26 जनवरी 2026 तक गांधी मैदान, बुद्धि विहार, मुरादाबाद में किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल एक उत्सव है, बल्कि मुरादाबाद मंडल की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने का एक ऐतिहासिक प्रयास भी है।
इस साहित्योत्सव का उद्देश्य जनसामान्य को विभिन्न भाषाओं के उत्कृष्ट राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्य से परिचित कराना है। साथ ही उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुरादाबाद मंडल की सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपराओं, लोक संस्कृति, खान–पान और बौद्धिक धरोहर को व्यापक पहचान दिलाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। यह आयोजन युवाओं और विद्यार्थियों में साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन मात्र एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि युवा चेतना को दिशा देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और बौद्धिक परंपराओं के पुनर्स्थापन का सामूहिक प्रयास है। इसमें देश–प्रदेश के ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, विचारकों और प्रकाशकों की सहभागिता प्रस्तावित है, जिससे यह साहित्योत्सव विचारों के आदान–प्रदान का सशक्त मंच बनेगा।
इसी क्रम में जिला अधिकारी अनुज सिंह ने मुरादाबाद मंडल के सभी बुद्धिजीवियों, साहित्य प्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास साहित्य, इतिहास, संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, विज्ञान अथवा अन्य विषयों से संबंधित उपयोगी और बहुमूल्य पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जनहित में दान करना चाहते हैं, तो वे इन पुस्तकों को ‘उदीषा: चौपाला साहित्योत्सव–2026’ के अवसर पर पुस्तक–दान (ज्ञान–दान) के रूप में भेंट कर सकते हैं।
दान स्वरूप प्राप्त पुस्तकों का उपयोग विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों में ज्ञान के प्रसार, अध्ययन संस्कृति के विकास और बौद्धिक चेतना के संवर्धन के लिए किया जाएगा। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पुस्तक–दान समाज के लिए एक दीर्घकालिक बौद्धिक निवेश सिद्ध होगा।
जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों से इस ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन में सक्रिय सहभागिता कर इसे सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनसहयोग से यह साहित्योत्सव मुरादाबाद को साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।
