अमरोहा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने किसानों की बढ़ती समस्याओं को लेकर सरकारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग किसानों की आमदनी दोगुनी होने का दावा कर रहा है, लेकिन 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट इन दावों की हकीकत उजागर करेगा।
नरेश चौधरी ने कहा कि खेती आज सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और बिजली जैसे कृषि संसाधनों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि सीमांत और छोटे किसानों की आय तेजी से गिर रही है। आमदनी आधी और खर्च दोगुना हो चुका है, जिससे किसान कर्ज, बेरोजगारी और पलायन की ओर धकेले जा रहे हैं।

धनौरा तहसील क्षेत्र के किसान सतबीर भाटी का उदाहरण देते हुए चौधरी ने कहा कि सरकार धान की खरीद में रुचि नहीं दिखा रही है। हजारों साल पुरानी खेती आज छोटे किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। उन्होंने चेताया कि खेती की उपेक्षा का सीधा असर बेरोजगारी, महंगाई और दूषित पानी से फैल रही गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है। नाईपुरा गांव के ग्रामीण पलायन को मजबूर हैं, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कहा कि 26 जनवरी केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उस संघर्ष की याद है, जब देश में राजा नहीं रहा और प्रजा नागरिक बनी। उन्होंने कहा कि किसान ही देश की एकता और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें किसानों से किए गए वादों से मुकर रही हैं।
गणतंत्र दिवस के दिन भी भाकियू संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में शहबाजपुर डोर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे दूषित जल से प्रभावित ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए चल रहा बेमियादी धरना 37वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और मिष्ठान वितरण कर गणतंत्र दिवस मनाया गया।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने संगठन को किसान हितैषी और अराजनैतिक बताते हुए कहा कि भाकियू संयुक्त मोर्चा न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किसानों की आवाज बुलंद करता है और दमनकारी नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहता है।
इस अवसर पर किसानों की प्रमुख मांगें रखते हुए अरुण सिद्धू ने कहा कि किसानों को कर्ज नहीं, सम्मान चाहिए। उन्होंने फसलों पर उचित मूल्य, पाम ऑयल आयात पर रोक, गेहूं-चावल के निर्यात की अनुमति तथा पीएम किसान सम्मान निधि को 25 हजार रुपये प्रतिवर्ष करने की मांग की। साथ ही किसानों से एकजुट होकर मतदान के माध्यम से अपनी ताकत दिखाने और व्यवस्था में बदलाव लाने का आह्वान किया।
धरना और कार्यक्रम में चौधरी चरणसिंह, ओमप्रकाश सिंह (दरोगा), अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली, चंद्रपाल सिंह, एससी-एसटी मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष रिंकू सागर, तेजपाल सिंह, विजय सिंह, रघुवीर सिंह, शानू चौधरी, सरदार चोखे सिंह सेखों सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
