अमरोहा। जिले के औद्योगिक कस्बे गजरौला में रासायनिक कारखानों से फैल रहे भीषण प्रदूषण के खिलाफ किसानों और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहबाजपुर डोर क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के नेतृत्व में 39 दिनों से बेमियादी धरना जारी है। दूषित पानी, बर्बाद होती फसलें और गंभीर स्वास्थ्य संकट को लेकर किसान लगातार प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय सचिव चौधरी चंद्रपाल सिंह ने कहा कि गजरौला के रासायनिक कारखाने पानी, मिट्टी और हवा—तीनों को जहरीला बना रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दूषित जल के कारण जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं और यह स्थिति मानवाधिकारों पर सीधा हमला है। नाईपुरा गांव का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वहां जल संकट और बीमारियों का खतरा भयावह रूप ले चुका है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने प्रदूषण की गंभीरता पर चिंता जताते हुए कहा कि नाईपुरा और आसपास के इलाकों में श्वसन रोग, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। दूषित हवा, पानी और मिट्टी के कारण लोग समय से पहले मौत का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से स्वच्छ वातावरण और साझा मानवता के लिए एकजुट होने की भावुक अपील की।

किसानों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयां बिना शोधन के रासायनिक अपशिष्ट नदियों और नालों में छोड़ रही हैं, जिससे भूजल पीला और जहरीला हो गया है। ट्यूबवेल और हैंडपंप से निकलने वाला पानी त्वचा रोग, पेट की बीमारियों और फसल नुकसान का कारण बन रहा है। मवेशी बीमार पड़ रहे हैं और खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
हालांकि हाल के महीनों में प्रशासन की ओर से सैंपल जांच और निगरानी की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन धरनारत किसानों का कहना है कि ये प्रयास नाकाफी हैं। अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।
इस धरने में होमपाल सिंह, रामप्रसाद, दिलशाद अली, ओम प्रकाश सिंह, समरपाल सिंह, विजय सिंह, आशा देवी, नूरजहां, कृष्णा देवी समेत बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण मौजूद रहे। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष सिर्फ गजरौला तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण और मानव-पर्यावरण संतुलन को बचाने की लड़ाई है।
