29 जनवरी 2026 को हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्णायक जीत हासिल की है। भाजपा उम्मीदवार सौरभ जोशी को चंडीगढ़ का नया मेयर चुना गया है। विपक्षी एकता की कमी और चुनाव नियमों में हुए ऐतिहासिक बदलाव के बीच यह पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा का दबदबा
इस बार चंडीगढ़ मेयर का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया था, क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हो सका। भाजपा के सौरभ जोशी को कुल 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के योगेश ढींगरा को 11 और कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गब्बी को केवल 7 वोट (6 पार्षद + 1 सांसद) प्राप्त हुए। विपक्षी वोटों के इस बिखराव ने भाजपा की जीत की राह को आसान बना दिया।
पहली बार ‘हाथ उठाकर’ हुआ मतदान
चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास में यह पहला अवसर था जब मेयर का चुनाव ‘शो ऑफ हैंड्स’ (Show of Hands) यानी हाथ उठाकर किया गया। पिछले साल हुए बैलेट पेपर विवाद और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद प्रशासन ने नियमों में संशोधन किया था ताकि वोटिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे। ओपन वोटिंग के कारण किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या बैलेट पेपर से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो गई। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी वोटिंग की वीडियोग्राफी भी की गई.
सभी तीन महत्वपूर्ण पदों पर भाजपा का कब्जा
मेयर पद के साथ-साथ भाजपा ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी क्लीन स्वीप किया। भाजपा के जसमनप्रीत सिंह को सीनियर डिप्टी मेयर और सुमन शर्मा को डिप्टी मेयर चुना गया। इस जीत के साथ भाजपा ने नगर निगम पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। मेयर चुने जाने के बाद सौरभ जोशी ने अपनी प्राथमिकताओं में शहर के विकास कार्यों को गति देना और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार करना बताया है।
विपक्ष की रणनीतिक विफलता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘इंडिया ब्लॉक’ के घटकों (AAP और कांग्रेस) का अलग-अलग चुनाव लड़ना भाजपा के लिए वरदान साबित हुआ। जहाँ पिछले साल दोनों दलों ने मिलकर भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी, वहीं इस बार आपसी सहमति न बन पाने के कारण मेयर की कुर्सी फिर से भाजपा के पास चली गई। सौरभ जोशी अब हरप्रीत कौर बबला की जगह लेंगे और आगामी नगर निगम चुनावों तक शहर की कमान संभालेंगे।
