अमरोहा। मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक न किए जाने को लेकर किसानों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। प्रशासनिक लापरवाही और प्रदूषण के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर किसान 31 जनवरी, शनिवार को पुतला दहन कर विरोध जताएंगे।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कहा कि हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। गजरौला क्षेत्र में हाल ही में एक मजदूर दंपति की रहस्यमय बीमारी से मात्र दस मिनट के अंतराल में मौत हो जाना बेहद चिंताजनक है। यह घटना प्रशासन की लाचारी, कमजोर इच्छाशक्ति और औद्योगिक घरानों के दबाव को उजागर करती है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि नाईपुरा और आसपास के गांवों की जनता केवल पानी नहीं, बल्कि व्यवस्था की उदासीनता का जहर झेल रही है।
गजरौला क्षेत्र के शहबाजपुर डोर (नेशनल हाईवे-9 किनारे) भाकियू संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा बेमियादी धरना शुक्रवार को 41वें दिन भी जारी रहा। यह धरना रासायनिक कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के कारण भूजल में फैल रहे केमिकल प्रदूषण, दूषित पेयजल आपूर्ति और उससे पैदा हो रहे गंभीर जनस्वास्थ्य संकट के विरोध में चल रहा है।

किसानों का आरोप है कि इलाके के कई गांवों में ट्यूबवेल और घरेलू नलों से जहरीला पानी निकल रहा है। इससे फसलें नष्ट हो रही हैं और ग्रामीण गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा लिए गए पानी और मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई।
अरुण सिद्धू ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई और दूषित जल के जिम्मेदार कारखानों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शनिवार को होने वाला पुतला दहन इसी चेतावनी का हिस्सा है।
धरना स्थल नेशनल हाईवे-9 के किनारे होने से यातायात आंशिक रूप से प्रभावित हो रहा है, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं। संगठन के अनुसार गजरौला और आसपास के करीब 40 गांव इस समस्या से प्रभावित हैं। पहले भी किसानों ने नमूने लेने आई टीम का विरोध किया और ज्ञापन सौंपे, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान और अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। कड़ाके की ठंड और बारिश के बावजूद सैकड़ों किसान, मजदूर और स्थानीय लोग आंदोलन में डटे हुए हैं।
धरने में राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, मंडलाध्यक्ष एहसान अली के अलावा मास्टर सुरेश चंद, ओमप्रकाश, होमपाल, समरपाल, विजय सिंह, गंगाराम, रहीस अहमद, धरमवीर, चरण सिंह, राजू, अशद अली, अदनान अली, रामप्रसाद, सोमपाल सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
