अमरोहा। जहरीले और दूषित पानी की समस्या को लेकर गजरौला में शुक्रवार को किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। प्रशासन की कथित लापरवाही के विरोध में किसानों ने गजरौला कस्बे में पुतला दहन किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक स्वच्छ पेयजल को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और तेज होगा।

पुतला दहन के बाद किसान शहबाजपुर डोर गांव के समीप चल रहे भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के बेमियादी धरने में शामिल हुए, जो 42वें दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और प्रतिकूल मौसम के बावजूद धरनास्थल पर किसानों की मौजूदगी यह साफ संकेत दे रही है कि यह आंदोलन अब केवल मांग नहीं, बल्कि जीवन और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नाईपुरा गांव में सरकारी जल नल योजना पूरी तरह विफल साबित हुई है। हैंडपंप और ट्यूबवेल से पीला, दुर्गंधयुक्त और रासायनिक तत्वों से युक्त पानी निकल रहा है। इसी पानी के सेवन से कैंसर, दमा, त्वचा रोग और श्वसन संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। फसलें बर्बाद हो रही हैं, पशुधन प्रभावित है और असमय मौतों की आशंका ने ग्रामीणों को भयभीत कर दिया है।

किसान नेताओं ने इस संकट को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल केवल सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी मानवाधिकार है। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई हालिया मौतों का हवाला देते हुए चेताया गया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो नाईपुरा भी किसी बड़ी जन-स्वास्थ्य त्रासदी का केंद्र बन सकता है।

वक्ताओं ने ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए। किसान नेताओं ने कहा कि जब रायबरेली एम्स में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगतप्रकाश नड्डा और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वास्थ्य उपलब्धियों की चर्चा कर रहे हैं, तब नाईपुरा के ग्रामीण जहरीला पानी पीने को मजबूर क्यों हैं? आखिर औद्योगिक प्रदूषण की कीमत गरीब किसानों और बच्चों को क्यों चुकानी पड़ रही है?
धरनास्थल से प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए। कहा गया कि बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान रासायनिक अपशिष्ट जलस्रोतों में छोड़ रहे हैं, जिससे नहरें, नदियां और भूजल जहरीला हो चुका है। प्रशासनिक उदासीनता ने हालात को और भयावह बना दिया है।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य जांच शिविर और प्रदूषण फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन मानवाधिकार आयोग और न्यायिक मंचों तक ले जाया जाएगा।
इस मौके पर वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. गौतम लम्बरदार, प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, डॉ. जयपाल सिंह, मंडलाध्यक्ष एहसान अली, सुरेंद्र सिंह प्रधान, अब्दुल राशिद, दिलशाद चौधरी, अमरजीत देओल, आसिफ चौधरी, ओम प्रकाश, होमपाल सिंह, असगर चौधरी, अब्दुल रहीम, मनोहर लाल, आलम चौधरी, हरिद्वारी सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान संगठनों के पदाधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।
