अमरोहा।गजरौला औद्योगिक क्षेत्र और गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों की पारिस्थितिकी आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है, जहां कभी अनेक छोटी-बड़ी नदियां और प्राकृतिक नाले उद्गम स्थल के रूप में मौजूद थे। ये जलस्रोत न केवल जीव-जंतुओं और ग्रामीण आबादी के लिए जीवनरेखा थे, बल्कि भूजल पुनर्भरण में भी अहम भूमिका निभाते थे।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस पूरे क्षेत्र को भूजल के अंधाधुंध दोहन के लिए पुनर्परिभाषित करने के बजाय, व्यापक पुनर्स्थापन और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। यदि मौजूदा विकास मॉडल यूं ही जारी रहा, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे।

इन्हीं चिंताओं को लेकर किसान संगठन खुलकर सामने आए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वर्तमान विकास मॉडल की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और प्रदूषण को आर्थिक प्रगति का पैमाना बना दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल-जंगल-जमीन को नुकसान पहुंचाकर किसी भी तरह की टिकाऊ प्रगति संभव नहीं है।
किसानों के अनुसार, दीर्घकालिक दृष्टि से यह नीति ग्रामीण समाज के लिए भयावह आजीविका संकट खड़ा कर रही है, क्योंकि गांवों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। उनका कहना है कि किसानों की चिंता का समाधान केवल औद्योगिक लाभ-हानि के तराजू पर नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन के संरक्षण को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए। इस पूरे मुद्दे पर व्यापक और गंभीर सार्वजनिक बहस की जरूरत बताई जा रही है।

इन्हीं मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहबाजपुर डोर में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 49वें दिन में प्रवेश कर गया। धरना स्थल पर आज भारी संख्या में किसान, महिलाएं और खेती-किसानी पर निर्भर लोग समर्थन जताने पहुंचे।
धरने का नेतृत्व कर रहे भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के साथ संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रमुख रूप से राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष अहसान अली, संतोष यादव, झलक सिंघल, सलमान, शुभम शर्मा, अजय सिंघल, आशाराम, प्रकाश, धर्मपाल, धर्मवीर, राजेश पप्पी, ब्रजमोहन शर्मा, अमिताभ सैनी, सोमपाल सिंह, तेजपाल सिंह, नरेंद्र चौहान, होमपाल सिंह, मंसूर अली, लखपत सिंह तथा समरपाल सैनी सहित अनेक किसान नेता धरना स्थल पर उपस्थित रहे।
किसानों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि जब तक पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण हितों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
