अमरोहा। गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से हो रहे कथित भूजल प्रदूषण के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना 52वें दिन भी जारी रहा। शहबाजपुर डोर गांव में चल रहे इस आंदोलन में किसान सरकार से ठोस कार्रवाई और प्रभावित ग्रामीणों को राहत देने की मांग कर रहे हैं।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में हाल ही में पेश बजट में गजरौला के इस गंभीर संकट के समाधान के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की विडंबना बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर जनता की सेहत और आजीविका से समझौता किया जा रहा है, जिससे किसानों में गहरा रोष है।

किसानों का आरोप है कि गजरौला स्थित रासायनिक इकाइयों के जहरीले अपशिष्ट के कारण नाईपुरा और आसपास के गांवों का भूजल दूषित हो चुका है। हैंडपंपों से निकलने वाले पीले और दुर्गंधयुक्त पानी के सेवन से लिवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषी फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना जारी रहेगा।
किसान नेताओं ने इंडो-ट्रेड डील जैसे समझौतों का भी विरोध किया, जिन्हें उन्होंने किसान-विरोधी बताते हुए कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जनस्वास्थ्य और कथित इंडो-ट्रंप डील के मुद्दे पर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
धरना स्थल पर प्रमुख रूप से भाकियू अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली, दिलशाद सलमानी, गंगाराम, होमपाल, समरपाल, ओमप्रकाश, महेंद्र सिंह, सोमपाल, मंसूर अली, अशद अली, हरद्वारी, धर्मवीर, अंकित कुमार, अदनान अली, चंद्रपाल सिंह सहित नाईपुरा गांव और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
यह आंदोलन क्षेत्र में जल, जमीन और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर सवालों को सामने ला रहा है, जिन पर प्रशासनिक स्तर पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।
