अमरोहा। जनपद के गजरौला क्षेत्र के नाईपुरा गांव में भूजल प्रदूषण के खिलाफ किसानों का धरना 58वें दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले ग्रामीणों ने रासायनिक कारखानों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई।
किसानों का आरोप है कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने क्षेत्र के भूजल को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गांव में पीने का पानी पीला और बदबूदार हो गया है, जिससे लोगों और पशुओं में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दूषित पानी के कारण त्वचा रोग, पेट संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियां बढ़ी हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन संकट में है।

धरनास्थल पर किसानों ने सरकार द्वारा आयोजित किसान दिवस, जनसुनवाई, जनता दर्शन, तहसील दिवस और मुख्यमंत्री पोर्टल जैसी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि ये तंत्र प्रभावी होते तो उन्हें दो महीने से सड़कों पर बैठकर संघर्ष नहीं करना पड़ता। उन्होंने तथाकथित औद्योगिक विकास पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को लाभ के बजाय नुकसान हुआ है। आरोप लगाया कि कारखानेदारों ने किसानों की जमीनें खरीदकर उन्हें मजदूर बना दिया है।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौते और औद्योगिक नीतियां किसानों के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही हालात रहे तो किसान अपनी जमीन और पहचान दोनों खो देंगे। उन्होंने कहा कि जमीन की कीमत अब फसलों से नहीं, बल्कि बाहरी पूंजी और प्रभाव से तय की जा रही है, जो ग्रामीण ढांचे के लिए गंभीर चुनौती है।
प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि प्रदूषण की समस्या ने किसानों की आजीविका और स्वास्थ्य दोनों को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने मांग की कि दोषी कारखानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था हो और प्रदूषण की स्थायी रोकथाम के उपाय किए जाएं। अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने ग्रामीणों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल नाईपुरा गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अस्मिता और भविष्य से जुड़ा है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

धरने में वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, ओमपाल सिंह, मंसूर अली, होमपाल सिंह, ओमप्रकाश सिंह, आशाराम, पृथ्वी सिंह, गंगाराम समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। यह आंदोलन अब जमीन, पानी और पहचान बचाने की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
