अमरोहा। उत्तर प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने के दावे को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है। किसान नेताओं ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सरकार गठन के बाद बड़े प्रचार के साथ गठित किए गए ‘कृषक समृद्धि आयोग’ का आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि मार्च 2017 में सरकार बनने के बाद आयोग का गठन कर किसानों की आय दोगुनी करने का भरोसा दिलाया गया था। अखबारों में पूरे पृष्ठ के विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार किया गया कि सर्वे के आधार पर आयोग की रिपोर्ट किसानों की तकदीर बदल देगी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी न तो कोई ठोस सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही आयोग की एक भी बैठक बुलाई गई।

किसान नेताओं का आरोप है कि भाजपा शासन में कृषि लागत लगातार बढ़ी है, जबकि किसानों की आय घटी है। उन्होंने कहा कि पहले 50 किलो का खाद का बोरा घटाकर 45 किलो और फिर 40 किलो कर दिया गया, लेकिन कीमतों में कोई कमी नहीं की गई। वर्ष 2022 तक आय दोगुनी करने का वादा अधूरा रह गया और अब 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, फिर भी किसानों से जुड़े मूल मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
69 दिनों से धरने पर किसान
गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले कथित जहरीले उत्सर्जन के विरोध में शहबाजपुर डोर क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसान पिछले 69 दिनों से धरना दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि जल, जंगल, जमीन और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार का कोई प्रतिनिधि अब तक हाल जानने नहीं पहुंचा।
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने औद्योगिक विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि गजरौला का विकास ‘मरते हुए गांव’ की तस्वीर पेश कर रहा है। उनका कहना है कि हरियाली, वृक्ष, तुलसी-नीम और गौवंश को खत्म कर सीमेंट-कंक्रीट का विस्तार किया गया, जिससे पर्यावरण और ग्रामीण जीवन दोनों प्रभावित हुए हैं। गर्मी में बढ़ता तापमान, प्रदूषित पानी और एलर्जी-दमा जैसी बीमारियों में इजाफा इसकी देन है।
किसान नेताओं ने सुझाव दिया कि यदि पूर्ण ग्रामीण जीवनशैली संभव नहीं है तो कम से कम 50 प्रतिशत ग्राम्य जीवनशैली अपनाई जाए। घरों की बालकनी में नीम-तुलसी जैसे पौधे लगाए जाएं और गोबर से जैविक खाद का उपयोग बढ़ाया जाए, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को लाभ मिल सके।

धरना स्थल पर मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, सुधीर प्रधान, जिला अध्यक्ष सुरजीत सिंह, पूर्व सभासद संजीव अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
