ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
- चुप्पी ‘तटस्थता’ नहीं, ‘कर्तव्यहीनता’ है: उन्होंने कहा कि खामेनेई की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी कोई रणनीतिक तटस्थता नहीं है, बल्कि यह अपनी नैतिक और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी से पीछे हटना (abdication) है।
- विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल: सोनिया गांधी ने तर्क दिया कि एक पदसीन राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों और नियमों में एक गहरा विच्छेद (grave rupture) है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की यह अस्पष्टता भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करती है।
- चुनिंदा निंदा का आरोप: उन्होंने पीएम मोदी को घेरते हुए कहा कि जहां प्रधानमंत्री ने यूएई पर ईरान के जवाबी हमलों की तुरंत निंदा की, वहीं वह ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर खामोश रहे।
- संसद में बहस की मांग: सोनिया गांधी ने मांग की है कि जब बजट सत्र का दूसरा हिस्सा शुरू हो, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के इस संकट और सरकार की “परेशान करने वाली चुप्पी” पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए।
- ऐतिहासिक संबंधों का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि ईरान के साथ भारत के संबंध न केवल रणनीतिक हैं बल्कि सभ्यतागत भी हैं, और ईरान ने अतीत में कश्मीर जैसे मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का साथ दिया था।
पृष्ठभूमि:
आयतुल्ला खामेनेई की मौत 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए कथित हवाई हमलों में हुई थी। भारत सरकार ने इस पर कोई औपचारिक निंदा जारी नहीं की है, बल्कि केवल क्षेत्र में संयम और तनाव कम करने की अपील की है।
