अमरोहा। रंगों और खुशियों का पर्व होली इस बार जनपद के गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र में फीका नजर आया। जहां एक ओर देशभर में रंग-गुलाल उड़ रहा था, वहीं नाईपुरा इलाके में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले उत्सर्जन ने हवा और पानी को दूषित कर दिया है। इलाके में प्रदूषण का साया इतना गहरा है कि त्योहार की रौनक भी चिंता में बदल गई।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसान शहबाजपुर डोर पर पिछले 74 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि क्षेत्र की फैक्ट्रियां अपशिष्ट को ठीक ढंग से निस्तारित नहीं कर रहीं, जिससे भूजल और बगद नदी का पानी प्रदूषित हो चुका है। उनका कहना है कि पानी पीला, बदबूदार और उपयोग के लायक नहीं रह गया है।

किसानों के मुताबिक दूषित पानी से फसलें प्रभावित हो रही हैं, पशुधन बीमार पड़ रहा है और ग्रामीणों में दमा व त्वचा रोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। होली के दिन भी बच्चों को घरों में यह समझाकर रोका गया कि वे रंग खेलें, लेकिन पानी के संपर्क से बचें। बच्चों के चेहरों पर उत्साह की जगह असमंजस और मायूसी दिखाई दी।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान तथा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली सहित अन्य किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन, प्रदर्शन और पुतला दहन के बावजूद कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई। किसान जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

धरने में महिला किसानों की भी सक्रिय भागीदारी है। श्रीमती कृष्ण, श्रीमती दयावती, श्रीमती नूरजहां, श्रीमती मुन्नी, श्रीमती केलासो, श्रीमती रामेश्री, श्रीमती सूरजमुखी, श्रीमती होमवती, श्रीमती संतोष सहित समरपाल सिंह, सतीराम सिंह, दलवीर सिंह, ओमप्रकाश सिंह, राम प्रसाद सिंह, गंगाराम सिंह, होमपाल सिंह, मुस्तकीम और अशद अली समेत विभिन्न गांवों के किसान मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि यह संघर्ष केवल पानी की शुद्धता का नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका की रक्षा का है। कुछ परिवार गांव छोड़ने तक पर विचार कर रहे हैं। होली के अवसर पर जहां रंगों की बौछार होनी चाहिए थी, वहां न्याय और स्वच्छ पर्यावरण की मांग गूंजती रही।
