मुरादाबाद। आलू के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग उत्तर प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) द्वारा शुक्रवार को सर्किट हाउस मुरादाबाद में एक दिवसीय आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में मुरादाबाद नगर विधायक रितेश गुप्ता, कुन्दरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त व डॉ. हरी सिंह ढिल्लो, भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह तथा हाफेड के प्रबंध निदेशक डॉ. सर्वेश कुमार सहित सहारनपुर, मेरठ, बरेली और मुरादाबाद मंडल के मंडलीय व जनपदीय उद्यान अधिकारी उपस्थित रहे।

सम्मेलन में मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर, सम्भल, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मेरठ, बागपत, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सहित कई जिलों से आए आलू उत्पादक किसानों, शीतगृह स्वामियों, व्यापारियों, निर्यातकों और प्रोसेसिंग इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान आलू के भंडारण, विपणन और निर्यात से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
सम्मेलन में आलू की लगभग 25 उन्नत किस्मों का प्रदर्शन भी किया गया, जिनमें चिप्सोना-1 व 3, कुफरी बहार, कुफरी गंगा, नेपोलियन, पुखराज, एफसी-11, जमुनिया, फेडीलिटी, सूर्या, नीलकंठ, एस-4, इनोवेटर और कुफरी ख्याति जैसी प्रजातियां शामिल रहीं।

किसानों और व्यापारियों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। सम्भल जिले के किसान दीपक शर्मा ने बताया कि जिले में आलू उत्पादन के अनुरूप भंडारण की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। वहीं बदायूं के अनुपम अग्रवाल ने कोल्ड स्टोरेज में भंडारण पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग उठाई।
पीलीभीत के शांति सिंह ने आलू प्रोसेसिंग परियोजना की बैंक स्तर पर लंबित फाइलों का मुद्दा रखा, जबकि मेरठ के दाताराम ने आलू बीज प्रमाणीकरण के नियमों में कुछ राहत देने की मांग की। इसके अलावा शाहजहांपुर, हापुड़ और बुलन्दशहर के किसानों व कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने भी विपणन, भंडारण और प्रोसेसिंग से जुड़े मुद्दों पर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है और देश के कुल उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत आलू यहीं पैदा होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उत्पादित लगभग 60 प्रतिशत आलू आगरा, अलीगढ़, मेरठ और कानपुर मंडल के दस जिलों में उगाया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार आलू के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित कर रही है। इसी क्रम में 9 जनवरी को रांची, 30 जनवरी को भुवनेश्वर, 10 मार्च को आगरा और 11 मार्च को बाराबंकी में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। 13 मार्च को मुरादाबाद और पुणे में सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जबकि 17 जून को बेंगलुरु में भी इसी तरह का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

राज्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आलू बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए खरीद और भंडारण की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। इस वर्ष प्रदेश में आलू के उत्पादन के अनुपात में कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध है और किसी भी किसान को भंडारण के लिए परेशानी नहीं होगी। किसान आलू को शीतगृहों में सुरक्षित रखकर बेहतर कीमत मिलने पर बेच सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र स्थापित किया गया है। इसके साथ ही किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के लिए हापुड़ के बाबूगढ़ और कुशीनगर के कसया में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर पोटेटो” की स्थापना की गई है।

कार्यक्रम के अंत में मंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 20 आलू उत्पादक किसानों, शीतगृह स्वामियों और व्यापारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
