दो दिन की तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। बड़े, मझोले और छोटे—हर तरह के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
BSE Sensex 1690 अंक यानी 2.25% लुढ़ककर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 486 अंक (2.09%) गिरकर 22,819 पर आ गया। बैंकिंग सेक्टर भी दबाव में रहा और Nifty Bank 1433 अंक टूटकर 52,274 पर बंद हुआ।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय तनाव रहा। Iran और United States के बीच हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। Donald Trump ने भले ही 10 दिनों तक ईरान के तेल ठिकानों पर हमला न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाने की बात कही हो, लेकिन बाजार ने इसे राहत के बजाय अनिश्चितता के संकेत के रूप में लिया।
सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। केवल Bharti Airtel, Tata Consultancy Services और Power Grid Corporation of India ही हरे निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव Reliance Industries पर दिखा, जिसका शेयर 4.60% गिरकर 1347 रुपये तक आ गया।
इसके अलावा InterGlobe Aviation, Bajaj Finance और State Bank of India जैसे शेयरों में भी करीब 4% तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि बाकी कई शेयर 2% से ज्यादा टूटे।
निवेशकों को बड़ा झटका
बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। BSE Sensex का कुल मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये से घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी करीब 9 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।
मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव
पिछले दो सत्रों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूला, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर करीब 1.7% तक फिसल गए।
Bajaj Finserv, Axis Bank और HDFC Life Insurance जैसे शेयरों में भी 1–3% की गिरावट रही।
तेल की कीमतों और रुपये ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे आयात लागत बढ़ने की चिंता गहराई। दूसरी ओर, भारतीय रुपया भी कमजोर होकर 94 प्रति डॉलर के पार निकल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
अस्थिरता में तेज उछाल
बाजार की घबराहट India VIX में साफ दिखी, जो करीब 9% उछलकर 28 पर पहुंच गया। यह संकेत है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और मुनाफावसूली—इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को गहरे लाल निशान में धकेल दिया।
