पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाते हुए राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने उस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया, जिसमें प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रोके जाने की बात सामने आई थी।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हालात इतने गंभीर थे कि उन्हें देर रात सख्त आदेश जारी करने पड़े, तब जाकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। उन्होंने यह भी बताया कि जिस अधिकारी का घेराव हुआ, उसके घर में एक छोटा बच्चा भी मौजूद था, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
अदालत ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह चुनावी ड्यूटी में लगे अधिकारियों का मनोबल गिराने की सोची-समझी कोशिश लगती है। साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को अत्यधिक राजनीतिक ध्रुवीकरण वाला बताया।
एडवोकेट जनरल से बातचीत में चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि राज्य में हर मुद्दे को राजनीति के चश्मे से देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोर्ट पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए था और उपद्रवियों की पहचान से भी अनजान नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि जब पहले से सूचना थी, तो समय रहते न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर क्यों नहीं निकाला गया।
