अमरोहा। नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद अमरोहा जिले के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। किसी भी संभावित तनाव या अव्यवस्था को रोकने के लिए पुलिस ने यहां व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं और पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एहतियातन जनपद के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल गजरौला बुलाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस और पीएसी के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं, जबकि अधिकारियों को भी फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।

हाल ही में नोएडा के सेक्टर-8 सहित कई इलाकों में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई जगह आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। इसी घटनाक्रम के बाद गजरौला में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
गजरौला के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित प्रमुख इकाइयों जैसे जुबिलेंट इंग्रेविया और तावी टेवा के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है। बृहस्पतिवार से ही इन इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी पंकज त्यागी के नेतृत्व में पुलिस और पीएसी ने फ्लैग मार्च भी निकाला। इस दौरान मुख्य मार्गों, संवेदनशील स्थानों और फैक्ट्री परिसरों का निरीक्षण किया गया। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
श्रमिकों के बीच असंतोष की मुख्य वजह वेतन को लेकर है। कई श्रमिकों का कहना है कि 11 से 13 हजार रुपये मासिक आय में वर्तमान महंगाई के दौर में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। वे न्यूनतम वेतन को 20 से 26 हजार रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में घोषित वृद्धि को श्रमिक “नगण्य” बताते हुए इसे पर्याप्त नहीं मान रहे।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 के बाद से व्यापक मजदूरी संशोधन नहीं हुआ था। हाल के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने अंतरिम राहत के तौर पर वेतन में करीब 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके तहत गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये प्रतिमाह (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी) किया गया है। अन्य जिलों में भी 9 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि लागू की गई है।
हालांकि, श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मौजूदा आर्थिक दबाव के मुकाबले काफी कम है। ठेका प्रथा, कथित शोषण और बढ़ती महंगाई को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। वहीं प्रशासन का मानना है कि कुछ बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।

इसी बीच कई श्रमिकों ने साफ किया है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा या बाहरी हस्तक्षेप का समर्थन नहीं करते।
फिलहाल गजरौला में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन माहौल संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि श्रमिकों की मांगों और सरकार के फैसलों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती अभी बरकरार है।
