लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 समेत परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा हुई। किंतु जोरदार राजनीतिक हलचल के बीच बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब बहस के बाद सबसे अहम 131वें संविधान संशोधन विधेयक को मतदान के लिए पेश किया गया। विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। इससे सरकार की खूब किरकिरी हुई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि संशोधन पर विचार के प्रस्ताव के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। हालांकि, संविधान संशोधन पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। इस कारण संविधान (131वां) संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया।
इस विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत, यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी। हालांकि, इसके पक्ष में केवल 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इस तरह सरकार आवश्यक आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गई और विधेयक पारित नहीं हो सका।
विधेयक के गिरने के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की महिला सांसदों ने संसद परिसर में मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर 18 अप्रैल से राष्ट्रव्यापी प्रोटेस्ट का ऐलान भी कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि यह बिल एक दिन पहले ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया था।
बल के गिरने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “संशोधन विधेयक गिर गया. उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया, भारत ने देख लिया, INDIA ने रोक दिया, जय संविधान”।
