मुरादाबाद। मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री से जुड़ी संस्था यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी (YES) में चल रहा विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में संस्था के संस्थापक चेयरमैन रहे अनूप शंखधार को भी संगठन से निष्कासित कर दिया गया है। इसके साथ ही YES से बाहर किए गए प्रमुख निर्यातकों की संख्या तीन हो गई है।
इस घटनाक्रम ने इंडस्ट्री में हलचल तेज कर दी है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। खासतौर पर सितंबर में होने वाले सीओए (COA) सदस्य के चुनाव को लेकर माहौल पहले से ही संवेदनशील है। वर्तमान सदस्य अवधेश अग्रवाल का कार्यकाल उसी महीने समाप्त होने जा रहा है।
अनूप शंखधार का तीखा बयान
संगठन से हटाए जाने के बाद अनूप शंखधार ने मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संस्था में इस समय तानाशाही जैसा माहौल है और ऐसे लोग अहम पदों पर बैठे हैं, जिनका इंडस्ट्री के विकास में कोई योगदान नहीं रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग पर्दे के पीछे रहकर फैसले प्रभावित कर रहे हैं।
शंखधार के मुताबिक, निर्यातकों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने वालों को ही बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर पद हासिल किए गए, अब उन्हीं पर सवाल उठाना नेतृत्व को असहज कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्यातकों के हितों की आवाज आगे भी उठाई जाती रहेगी।
YES की स्थापना और नेतृत्व का इतिहास
यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी (YES) की स्थापना वर्ष 2009 में पांच निर्यातकों—अनूप शंखधार, नीरज खन्ना, उदित सरन, उदित अग्रवाल और विशाल अग्रवाल—ने मिलकर की थी। गठन के बाद अनूप शंखधार पहले चेयरमैन बने और वर्ष 2012 तक इस पद पर रहे। इसके बाद क्रमशः नीरज खन्ना, रोहित ढल और उदित सरन ने संगठन का नेतृत्व संभाला।
बाद में मिड-टर्म में रोहित ढल को दोबारा चेयरमैन बनाया गया। वर्ष 2020 में विशाल अग्रवाल को चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिन्हें हाल ही में संगठन से निष्कासित कर दिया गया।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही पूर्व नेशनल चेयरमैन विशाल अग्रवाल को “YES विरोधी गतिविधियों” के आरोप में संगठन से बाहर किया गया था। वहीं उदित अग्रवाल पहले ही संस्था से अलग हो चुके हैं और उदित सरन भी कथित अपमानजनक व्यवहार के चलते संगठन में सक्रिय नहीं हैं।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से YES के भीतर चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे मुरादाबाद की निर्यात इंडस्ट्री में अस्थिरता की स्थिति बनती दिख रही है।
