Mallikarjun Kharge ने Chennai में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Narendra Modi को लेकर विवादित बयान दे दिया, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। खरगे ने AIADMK पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्नादुराई की विचारधारा में विश्वास रखने वाले लोग मोदी के साथ कैसे जा सकते हैं, जो समानता और न्याय की बात नहीं करते।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के साथ गठबंधन कर एआईएडीएमके अपनी पहचान खो चुकी है और लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। इस दौरान खरगे ने मोदी को “आतंकवादी” तक कह दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
हालांकि बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मकसद प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी कहना नहीं था, बल्कि उनका इशारा इस ओर था कि वे केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राजनीतिक विरोधियों को डराने का काम करते हैं।
Mallikarjun Kharge ने Narendra Modi पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 के संसद में पारित न होने के बाद प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधित करना गलत है।
खरगे ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए उसे बीजेपी की “विस्तारित शाखा” बताया और पक्षपात का आरोप लगाया।
इससे पहले दिए गए अपने विवादित बयान पर सफाई देते हुए खरगे ने कहा कि उनका इरादा प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि उनकी कार्यशैली को ‘डराने-धमकाने वाली’ बताना था। उन्होंने आरोप लगाया कि Enforcement Directorate, Central Bureau of Investigation और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि 2023 में पारित विधेयक को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने परिसीमन को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह बीजेपी को एक सख्त और केंद्रीकृत सत्ता के रूप में पेश करना चाहती है। हालांकि ‘आतंकवादी’ जैसे शब्द के इस्तेमाल से यह मुद्दा उल्टा भी पड़ सकता है, क्योंकि बीजेपी इसे प्रधानमंत्री के अपमान और राष्ट्रवाद से जोड़कर जनता के बीच ले जा सकती है। वहीं, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों को उठाकर कांग्रेस खासतौर पर दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
