मुरादाबाद। स्मार्टफोन के दौर में 7 से 10 सेकंड तक सिमट चुकी लोगों की एकाग्रता को वापस लाने और पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए मुरादाबाद में एक अभिनव शुरुआत हुई है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने जिले में ‘एक पुष्प, एक पुस्तक’ और ‘सब पढ़ें, आगे बढ़ें’ अभियान का शुभारंभ किया है। इसके तहत अब जिले में भविष्य में आयोजित होने वाले सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत में 200 से 1500 रुपये तक के महंगे और प्लास्टिक युक्त बुके (पुष्पगुच्छ) नहीं दिए जाएंगे। इसके स्थान पर अतिथियों को मात्र एक फूल और एक अच्छी किताब भेंट की जाएगी। डीएम ने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सभी विभागों में सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
बुके की कम उम्र और प्लास्टिक का बढ़ता कचरा
जिलाधिकारी डॉ. पैंसिया ने मुरादाबाद में कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनके स्वागत में बड़ी संख्या में बुके आए थे। इनमें से 10 से 20 प्रतिशत बुके पूरी तरह प्लास्टिक के थे, जबकि ताजे फूलों वाले बुके में भी प्लास्टिक का भारी इस्तेमाल हुआ था। एक बुके की शेल्फ लाइफ महज 24 से 48 घंटे होती है; पानी में रखने पर भी यह अधिकतम एक सप्ताह ही टिकता है। इसके बाद यह प्लास्टिक और कचरे के रूप में हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचाता है। इस अपव्यय और पर्यावरणीय खतरे को देखते हुए ही बुके की जगह पुस्तक भेंट करने का निर्णय लिया गया, जो जीवनभर की स्मृति बन जाती है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक ज्ञान का प्रसार करती है।
‘पॉपकॉर्न माइंड’ से निपटने की कारगर दवा
आज के डिजिटल युग में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग ने आम आदमी के मस्तिष्क को ‘पॉपकॉर्न माइंड’ में तब्दील कर दिया है। लोगों में स्थिरता का अभाव हो गया है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (कंसंट्रेशन) घटकर महज 7, 8 या 10 सेकंड से लेकर अधिकतम एक मिनट तक रह गई है। इस प्रवृत्ति को सुधारने और इस गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या से निपटने के लिए पुस्तकों का अध्ययन बेहद जरूरी है। जब कोई व्यक्ति किताब पढ़ता है, तो उसकी एकाग्रता स्वतः बढ़ने लगती है। यह अभियान इसी खोई हुई एकाग्रता को वापस लाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
200 रुपये में बुके भी और एक बेहतरीन किताब भी
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह पहल बेहद फायदेमंद है। बाजार में एक सामान्य बुके की कीमत 200 से 250 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक होती है। वहीं, 200 से 250 रुपये की शुरुआत से लेकर 800 या 1000 रुपये तक में बेहतरीन से बेहतरीन किताबें आसानी से आ जाती हैं। डीएम का स्पष्ट मानना है कि जितने पैसे हम चंद घंटों में मुरझा जाने वाले फूलों पर खर्च करते हैं, उतने में हम किसी को उसका सबसे अच्छा दोस्त हमेशा के लिए भेंट कर सकते हैं। इससे कार्यालयों और घरों में एक छोटी लाइब्रेरी तैयार होगी और ‘घर-घर पुस्तक, घर-घर वाचन’ का लक्ष्य साकार होगा।
आमजन से भी जीवन के हर आयोजन में बदलाव की अपील
प्रधानमंत्री की प्रेरणा और मंडलायुक्त के सहयोग से शुरू किए गए इस अभियान को सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिलाधिकारी ने मुरादाबाद के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने निजी आयोजनों जैसे- गृह प्रवेश, विवाह समारोह, जन्मदिन या किसी से सामान्य मुलाकात के दौरान भी बुके की जगह किताब देने की संस्कृति को अपनाएं। डीएम ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को यह सख्त निर्देश भी दिए हैं कि वे अपने कार्यालयों के प्रमुख स्थलों पर इस अभियान से जुड़े पोस्टर, फ्लेक्स और प्रचार सामग्री अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें ताकि अधिकारी, कर्मचारी और आमजन इस मुहिम से प्रेरित होकर एक बड़े जनआंदोलन का हिस्सा बन सकें।
