ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब जांच केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस केस की जांच CBI से कराने की सिफारिश करते हुए औपचारिक अधिसूचना जारी की है। मृतका के परिवार ने आरोप लगाया था कि मामले में सबूतों को दबाने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि ससुराल पक्ष में एक पूर्व जिला जज शामिल हैं। परिवार का कहना है कि ऐसे में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, इसलिए CBI जांच जरूरी है।
कटारा हिल्स थाना, भोपाल में दर्ज इस केस में कथित दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु से जुड़ी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत CBI को पूरे मध्य प्रदेश में जांच का अधिकार देने की सहमति भी दे दी है। सरकार के मुताबिक एजेंसी इस मामले से जुड़े हर पहलू, साजिश और दुष्प्रेरण की भी जांच कर सकेगी।
इधर ट्विशा शर्मा के परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठा रहे हैं। परिवार ने पहले हुए पोस्टमार्टम में कई खामियां बताते हुए शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। इसी को लेकर उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि एम्स भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पूरी तरह संतोषजनक नहीं है और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है।
हालांकि इससे पहले भोपाल की निचली अदालत दोबारा पोस्टमार्टम की मांग वाली याचिका खारिज कर चुकी है। वहीं पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां, पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
