डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, दोषियों पर कार्रवाई और निशुल्क पुनर्मूल्यांकन की मांग
मुरादाबाद। माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और ऑनलाइन स्कैनिंग प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर शिवसेना विद्यार्थी प्रकोष्ठ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने महानगर प्रमुख आकाश कुमार के नेतृत्व में जिलाधिकारी मुरादाबाद को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप की मांग की।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और ऑनलाइन स्कैनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण हजारों विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम प्रभावित हुए हैं। संगठन का कहना है कि तकनीकी खामियों और कथित अनियमितताओं की वजह से अनेक विद्यार्थियों को उनकी मेहनत के अनुरूप अंक नहीं मिल सके, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ गया है।
शिवसेना विद्यार्थी प्रकोष्ठ ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही न केवल छात्रों के अधिकारों का हनन है, बल्कि उनके मनोबल को भी तोड़ने वाली है। संगठन ने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा उन विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने पूरे वर्ष कठिन परिश्रम कर परीक्षा दी थी।

ज्ञापन में कहा गया कि मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए बड़ी उम्मीदों और कठिन संघर्ष के साथ संसाधन जुटाते हैं। ऐसे में परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियां विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ गंभीर अन्याय के समान हैं। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थी प्रकोष्ठ ने मांग की कि कथित गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी प्रभावित विद्यार्थियों को निशुल्क पुनर्मूल्यांकन का अवसर दिया जाए तथा उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही मूल्यांकन और ऑनलाइन स्कैनिंग प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं संबंधित कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों को शीघ्र न्याय नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो शिवसेना विद्यार्थी प्रकोष्ठ व्यापक जनआंदोलन छेड़ने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। छात्र हितों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संगठन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।
