मुरादाबाद। शहर के चर्चित कोचिंग सेंटर के स्वामी एक गंभीर आपराधिक मामले में घिरते नजर आ रहे हैं। सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, स्कॉलर डेन संस्था के संचालक विवेक ठाकुर और उनकी सहयोगियों रिया और उपासना पर एक व्यक्ति से 10 लाख 81 हजार 710 रुपये की कथित धोखाधड़ी करने, विश्वास में लेकर रकम हड़पने और लगातार टालमटोल करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मुकदमा कमिश्नर आञ्जनेय कुमार सिंह से शिकायत किए जाने के बाद दर्ज हुआ है।
टिकट बुकिंग के कारोबार से शुरू हुआ विवाद, लाखों की रकम फंसने का आरोप
शिकायतकर्ता मल्होत्रा ट्रेवल्स के स्वामी हेमंत मल्होत्रा उर्फ सनी के अनुसार वह कई वर्षों से रेलवे, हवाई जहाज और विदेशी टिकटों की बुकिंग का कार्य करता रहा है तथा इसी सिलसिले में उसका संपर्क विवेक ठाकुर से हुआ था।
विभिन्न व्यक्तियों और सेलिब्रिटीज के टिकट बुक कराने के नाम पर लगातार बुकिंग कराई गई और भुगतान का भरोसा दिया जाता रहा।
एफआईआर में उल्लेख है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच विभिन्न फिल्मी गायक, निर्देशक और कलाकारों/सिलेब्रिटीज के लिए कई टिकट बुक कराए गए, जिनका भुगतान बाद में करने का आश्वासन दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भरोसे के आधार पर वह लगातार टिकट जारी करता रहा, लेकिन भुगतान नहीं मिला और बकाया राशि बढ़ती चली गई।
“सेलिब्रिटीज के नाम पर बुकिंग”, भुगतान के नाम पर सिर्फ आश्वासन?
एफआईआर के मुताबिक रिया और उपासना ने स्वयं को स्कॉलर डेन की कर्मचारी बताते हुए शिकायतकर्ता से संपर्क किया और विभिन्न कार्यक्रमों तथा व्यक्तियों के लिए टिकट बुक कराने के निर्देश दिए। आरोप है कि कई बार भुगतान की मांग करने पर भी रकम नहीं दी गई और हर बार जल्द भुगतान का भरोसा दिया जाता रहा।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जब बकाया राशि लाखों में पहुंच गई तो उसने बार-बार भुगतान की मांग की, लेकिन कथित तौर पर उसे केवल आश्वासन मिलता रहा। आरोप है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया और नए टिकट बुक कराने का दबाव बनाया जाता रहा।
“जो करना है कर लो…”: एफआईआर में दर्ज गंभीर आरोप
मामले का सबसे गंभीर हिस्सा वह है जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भुगतान मांगने पर उसे कथित रूप से अपमानित किया गया। एफआईआर के अनुसार जब वह विवेक ठाकुर से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा तो उसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि “जो करना है कर लो, कोई भुगतान नहीं दिया जाएगा।”
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे जानबूझकर विश्वास में लेकर टिकट प्राप्त किए गए और बाद में भुगतान रोक दिया गया। उसके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई आर्थिक धोखाधड़ी का हिस्सा थी।
पुलिस जांच के घेरे में स्कॉलर डेन नेटवर्क
एफआईआर में विवेक ठाकुर के साथ उनकी संस्था से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और उसकी फंसी हुई रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
दर्ज मुकदमे के अनुसार पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेकर विवेचना शुरू कर दी है। जांच के दौरान बैंकिंग लेनदेन, टिकट बुकिंग रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है।
सवालों के घेरे में कारोबारी विश्वसनीयता
यह मामला केवल एक आर्थिक विवाद नहीं बल्कि कारोबारी भरोसे और पेशेवर नैतिकता पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। यदि एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह मामला लाखों रुपये की कथित ठगी और विश्वासघात के बड़े प्रकरण के रूप में सामने आ सकता है।
