मुरादाबाद। स्कॉलर डेन कोचिंग संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर के खिलाफ थाना सिविल लाइंस में दर्ज हुए कथित धोखाधड़ी के मुकदमे के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का ऐसा दौर शुरू हुआ है जिसने पूरे मामले को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। मुकदमे की खबर सार्वजनिक होते ही फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोगों ने विवेक ठाकुर के खिलाफ टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। कई लोगों ने स्वयं को पीड़ित बताते हुए भुगतान न मिलने, आर्थिक नुकसान उठाने और कथित रूप से धमकाए जाने जैसे आरोप लगाए हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है तथा इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा किया जाना अभी शेष है। फिर भी एक साथ बड़ी संख्या में सामने आ रही प्रतिक्रियाओं ने शहर के लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित कर दिया है। उधर शुक्रवार को सागर सिक्योरिटी कंपनी की संचालिका द्वारा विवेक ठाकुर के खिलाफ लगभग 38 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान न करने का आरोप लगाया गया। उनके द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एसएसपी सतपाल अंतिल के दरबार में गुहार लगाने से मामला और गरमा गया है।
कमेंट बॉक्स बना शिकायतों का मंच
सोशल मीडिया पर विवेक ठाकुर से जुड़ी खबरों के नीचे सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने दावा किया है कि उनका भुगतान लंबे समय से बकाया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि काम या सेवाएं लेने के बाद भी उन्हें पूरा भुगतान नहीं किया गया। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने लिखा कि भुगतान की मांग करने पर उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा।
कई टिप्पणियों में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि पैसा मांगने वालों को कथित रूप से प्रभावशाली संबंधों का हवाला देकर चुप रहने या दबाव में आने के लिए कहा जाता था। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
एक मुकदमे के बाद खुलने लगीं कई परतें
शहर के लोगों का कहना है कि जैसे ही धोखाधड़ी के मुकदमे की जानकारी सार्वजनिक हुई, वैसे ही कई ऐसे लोग भी सामने आने लगे जिन्होंने पहले कभी सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें नहीं रखी थीं। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं से यह संकेत मिल रहा है कि मामला केवल एक मुकदमे तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि भविष्य में अन्य शिकायतें भी सामने आ सकती हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि यदि सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों में तथ्यात्मक आधार पाया जाता है तो संबंधित एजेंसियों को व्यापक जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।
संस्थान की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे सवाल
सोशल मीडिया पर केवल आर्थिक लेन-देन के आरोप ही नहीं लगाए जा रहे, बल्कि स्कॉलर डेन की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों ने मांग की है कि संस्थान की गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि वर्षों से शहर में यह चर्चा रही है कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नियमित स्कूल समय में कोचिंग संस्थान में मौजूद रहते हैं। सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि ऐसा है तो संबंधित विभागों द्वारा इसकी जांच क्यों नहीं की गई और शिक्षा व्यवस्था पर इसके क्या प्रभाव पड़े।
कई अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बना मामला
वर्तमान समय में विवेक ठाकुर और स्कॉलर डेन से जुड़ा विवाद शहर के सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो चुका है। चाय की दुकानों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सोशल मीडिया मंचों तक इस मामले को लेकर बहस चल रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि लगातार सामने आ रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच एजेंसियां इस दिशा में क्या कार्रवाई करती हैं।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप अपने आप में अंतिम सत्य नहीं माने जा सकते। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होती है। ऐसे में अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं। प्रकरण में आरोपी पक्ष का स्पष्टीकरण अभी तक प्राप्त नहीं हो सका है।
