अमरोहा। देश के नीति-निर्धारण में गरीब, मजदूर और किसानों के बच्चों की भागीदारी की वकालत करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर देश उन्हें कृतज्ञता के साथ याद कर रहा है। वह एक ऐसे जननेता थे जिनका मानना था कि विकसित भारत का सपना केवल शहरों की ऊंची अट्टालिकाओं से नहीं बल्कि खेतों की हरियाली और अन्नदाताओं की खुशहाली से ही सच हो सकता है। किसानों और वंचितों के अधिकारों को हमेशा सर्वोपरि रखने वाले इस किसान मसीहा का अमरोहा और जनपद की आंचलिक पत्रकारिता से भी बेहद गहरा व भावनात्मक जुड़ाव रहा।
ऐतिहासिक सघन क्षेत्र मंडी धनौरा में आयोजित राजेश पायलट पुण्यतिथि कार्यक्रम में यज्ञादि व प्रसाद वितरण के बाद गोष्ठी में विश्व हिंदी संवाद केंद्र तथा प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ बीएस जिंदल ने द्वारा स्वर्गीय राजेश पायलट को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
डॉ बीएस जिंदल ने कहा कि दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे-09 स्थित औद्योगिक क्षेत्र के राजनीति के केंद्र गजरौला हाईवे मोटल में आयोजित एक ऐतिहासिक आंचलिक पत्रकार सम्मेलन के दौरान कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष महिपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी, तत्कालीन कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवस्वरूप टंडन, धनौरा के उद्यमी अजीत जैन, मंडी धनौरा के तत्कालीन ब्लाक प्रमुख मास्टर परम सिंह, प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया पीटीआई के मुरादाबाद के प्रभारी उमेश कैरे, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मिश्र ‘नारद’ वरिष्ठ आंचलिक पत्रकार अरुण शर्मा, दिवंगत अलीहसन सैफी, स्व गुरुमुख सिंह चाहल, हाजी अब्दुल सलाम, तत्कालीन वेम आर्गेनिक कंपनी के दिल्ली मुख्यालय के निदेशक, एक दैनिक समाचार पत्र के मुरादाबाद संस्करण के संपादक नरनाराण गोयल , अन्य दैनिक के मुरादाबाद के प्रभारी संपादक स्वर्गीय महावीर शर्मा, तथा दिल्ली लखनऊ समेत देश के दिग्गज पत्रकारों की मौजूदगी में राजेश पायलट ने ग्रामीण पत्रकारिता की महत्ता को रेखांकित किया था।
उन्होंने बताया कि श्री पायलट ने उस समय बेहद सटीक शब्दों में कहा था कि जनपदीय आंचलिक पत्रकारिता की उपेक्षा करना ठीक वैसा ही है जैसे पौधों की कोंपलों को पानी देना और उसकी जड़ों की उपेक्षा करना। उनका दृढ़ विश्वास था कि पूरी दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकारों से सीधा संवाद स्थापित कर आजादी की लड़ाई से लेकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की वास्तविक लड़ाई को यही आंचलिक पत्रकार मुस्तैदी से लड़ते हैं। उन्होंने बतौर दूरदृष्टा पुरजोर तरीके से आगाह किया था कि आंचलिक पत्रकारिता को कमजोर करने का कोई भी प्रयास असल में ग्रामीण भारत को कमजोर करने जैसा है।
वक्ताओं ने कहा कि राजेश पायलट आम जनमानस के बीच उस नायक की तरह लोकप्रिय थे, जिसमें ठेठ और जमीनी भारत अपनी असल तस्वीर देखता था। आम जनता को सहूलियत देने के लिए उन्होंने केंद्रीय परिवहन मंत्री रहते हुए सबसे पहले दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों को उत्तर प्रदेश में चलाए जाने की ऐतिहासिक अनुमति प्रदान की थी।
अमरोहा जनपद की सरजमीं और यहां के जननेताओं से भी उनका गहरा स्नेह था। मंडी धनौरा में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के अनावरण के ऐतिहासिक अवसर पर उनके साथ तत्कालीन यूथ कांग्रेस के प्रखर दलित नेता डॉ. होरी सिंह भी मजबूती से खड़े नजर आए थे। आज राजेश पायलट की पुण्यतिथि के इस भावुक क्षण में अमरोहा की जनता और आंचलिक पत्रकारिता जगत न केवल अपने इस चहेते नायक को नमन कर रहा है, बल्कि दिवंगत दलित नेता डॉ. होरी सिंह के जनसेवा और सामाजिक समरसता के योगदान को भी शिद्दत से याद कर रहा है। जनसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की यह विरासत आज भी क्षेत्र के लोगों के दिलों में जीवित है।
