बहादुरगढ़। क्या आप कभी किसी कमरे में जाकर यह भूल गए हैं कि वहां क्यों आए थे? बातचीत के दौरान सही शब्द याद करने में कठिनाई हुई हो या फिर सामान्य काम भी मानसिक रूप से थका देने वाले लगने लगे हों? यदि ऐसा होता है, तो संभव है कि आप “ब्रेन फॉग” का अनुभव कर रहे हों। ब्रेन फॉग स्वयं कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह सोचने, याद रखने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अधिकांश लोगों में इसका संबंध तनाव, भावनात्मक दबाव, पर्याप्त आराम की कमी या व्यस्त जीवनशैली से होता है, लेकिन कई बार यह किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
ब्रेन फॉग को आमतौर पर मानसिक सुस्ती या दिमाग पर छाए धुंधलेपन के रूप में महसूस किया जाता है। इससे व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है, हाल की बातें, नाम या अपॉइंटमेंट भूलने की समस्या हो सकती है और सामान्य कार्यों को पूरा करने में अधिक समय लग सकता है। कुछ लोगों में यह समस्या कभी-कभी दिखाई देती है, जबकि कुछ लोग हफ्तों या महीनों तक मानसिक धुंधलापन महसूस कर सकते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. मनोज खनल ने बताया “तनाव ब्रेन फॉग का सबसे आम कारणों में से एक है। जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो मस्तिष्क की जानकारी को प्रोसेस करने और एकाग्रता बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कई चिंताएं एक साथ दिमाग पर हावी हो जाएं तो ध्यान भटकना, काम अधूरा रह जाना, याददाश्त कमजोर होना और एकाग्रता कम होना स्वाभाविक है। इसके अलावा शोक, रिश्तों में तनाव, कार्यस्थल का दबाव या किसी की देखभाल की जिम्मेदारी जैसी भावनात्मक चुनौतियां भी मानसिक थकान पैदा कर सकती हैं।
डॉ. मनोज ने आगे बताया “हालांकि ब्रेन फॉग के पीछे केवल तनाव और जीवनशैली ही जिम्मेदार नहीं होते। कई बार हार्मोनल बदलाव, विशेषकर मेनोपॉज, पेरीमेनोपॉज, थायरॉयड संबंधी समस्याएं, गर्भावस्था या प्रसव के बाद की अवस्था में भी यह समस्या देखी जाती है। विटामिन बी12, विटामिन डी और आयरन की कमी जैसी पोषण संबंधी कमियां भी याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ ऑटोइम्यून और सूजन संबंधी बीमारियों में भी मानसिक धुंधलापन महसूस हो सकता है, जो अक्सर थकान, जोड़ों के दर्द या कमजोरी जैसे अन्य लक्षणों के साथ दिखाई देता है।
कभी-कभार होने वाली भूलने की समस्या सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि ब्रेन फॉग कई सप्ताह या महीनों तक बना रहे, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन के बाद भी ठीक न हो, कामकाज या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने लगे, अचानक शुरू हो जाए या लगातार बढ़ता जाए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। यदि इसके साथ बार-बार भ्रम होना, याददाश्त में उल्लेखनीय कमी, बोलने में बदलाव, लगातार सिरदर्द, दृष्टि संबंधी समस्याएं, संतुलन बिगड़ना, शरीर में कमजोरी या सुन्नपन अथवा व्यवहार में अचानक परिवर्तन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो जांच करवाना और भी आवश्यक हो जाता है।
मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए कुछ सरल आदतें मददगार साबित हो सकती हैं। एक समय में एक ही काम पर ध्यान देना, नियमित अंतराल पर छोटे ब्रेक लेना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित नींद और भोजन की दिनचर्या बनाए रखना तथा तनाव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना ब्रेन फॉग को कम करने में सहायक हो सकता है। यदि तनाव या चिंता लंबे समय तक बनी रहे, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना लाभदायक हो सकता है@शांतनु/INN
