मुरादाबाद। मोहर्रम की दसवीं तारीख (यौमे आशूरा) पर शुक्रवार को शहर में आस्था, परंपरा और गमगीन माहौल के बीच ताजियों का जुलूस निकाला गया। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार सबसे पहले शहर के ऐतिहासिक कंबल वाले ताजिए को प्रशासनिक अधिकारियों, शहर इमाम और गणमान्य लोगों ने सलामी देकर रवाना किया। इसके बाद शहर के विभिन्न मोहल्लों से ताजियों के जुलूस अपने-अपने निर्धारित मार्गों से कर्बला की ओर बढ़ने लगे।

शुक्रवार शाम अस्र की नमाज के बाद पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए कंबल वाले ताजिए को सलामी दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने ताजिए को हाथ लगाकर सम्मान प्रकट किया और अमन-चैन की दुआ की। इसके बाद ताजिया अपने निर्धारित मार्ग से ईदगाह मैदान के लिए रवाना हुआ।
इस अवसर पर पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन, देहात विधायक नासिर कुरैशी, जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल, पुलिस अधीक्षक नगर कुमार रणविजय सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और ताजिया कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने ताजिए को सलाम कर अपनी अकीदत का इजहार किया।
सबसे आखिर में दफन होता है कंबल वाला ताजिया
मुरादाबाद की यह परंपरा पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखती है। सबसे पहले कंबल वाले ताजिए को ईदगाह मैदान में रखा जाता है। इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों से आने वाले अन्य ताजियों को कर्बला में ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है। सभी ताजियों के दफन होने के बाद सबसे अंत में कंबल वाले ताजिए को दफन किया जाता है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का स्थानीय लोगों में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

मन्नतों से जुड़ी है आस्था
कंबल वाले ताजिए को लेकर लोगों में गहरी आस्था देखने को मिलती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अकीदतमंद ताजिए के नीचे से गुजरकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से ताजिए के नीचे से गुजरने और दुआ करने पर मुरादें पूरी होती हैं। इसी वजह से हर वर्ष हजारों लोग इस परंपरा में शामिल होकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मोहर्रम के जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जुलूस मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र में क्षेत्राधिकारी (सीओ) और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार जुलूस की निगरानी कर रहे हैं। देर रात तक शहर के विभिन्न इलाकों से ताजियों का जुलूस कर्बला की ओर बढ़ता रहेगा।

मोहर्रम के अवसर पर पूरे शहर में गम, अकीदत और भाईचारे का वातावरण देखने को मिला। विभिन्न समुदायों के लोगों ने भी जुलूस का स्वागत कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
