फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। शुक्रवार (31 जुलाई) को सजा सुनाते हुए अदालत ने इस हत्याकांड को बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध बताया।
सजा सुनाने से पहले कोर्ट ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर तरीके से की गई थी। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और हत्या के बाद शव को घसीटकर चांद बाग इलाके में एक नाले में फेंक दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका असाधारण रूप से निर्मम था और इस घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस मामले में दिल्ली पुलिस और अंकित शर्मा के परिवार ने सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों के निशान मिले थे, जिनमें सात घाव जानलेवा थे और 16 चोटें धारदार हथियार से पहुंचाई गई थीं। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि मौत के बाद भी शव के साथ बर्बरता की गई।
गौरतलब है कि 13 जुलाई 2026 को कोर्ट ने ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को इस मामले में दोषी करार दिया था। हालांकि, ताहिर हुसैन के वकील ने फांसी की सजा की मांग का विरोध करते हुए दलील दी थी कि केवल चोटों की संख्या के आधार पर मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि घटना के दौरान ताहिर हुसैन ने स्वयं पुलिस को फोन किया था।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए मामले का निपटारा किया।
