अमरोहा। उत्तर प्रदेश में जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों के सामने गहराते पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक दबाव के संकट के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष अजय राय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर मीडियाकर्मियों की आवाज उठाए जाने का स्थानीय पत्रकारों ने सहर्ष स्वागत किया है तथा अन्य राजनैतिक दलों से भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के अधिकारों हेतु ऐसी ही पहल करने की अपेक्षा जताई है।
गौरतलब है कि देशभर में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए पेंशन योजनाएं लागू हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश संभवतः ऐसा पहला राज्य है जहाँ जिला पत्रकारों के प्रति प्रशासनिक व राजनीतिक उदासीन रवैया अपनाए जाने के कारण मुख्यमंत्री की स्पष्ट घोषणा के बावजूद पेंशन योजना को आज तक धरातल पर लागू नहीं किया जा सका है। इसके साथ ही कैशलेस इलाज हेतु आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की घोषणाएं भी लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। इसके अतिरिक्त, जिला, तहसील व पुलिस प्रशासन द्वारा पत्रकारों से केवल अपनी विभागीय उपलब्धियों व सरकारी विज्ञप्तियों को प्रकाशित कराने की अपेक्षा रखी जाती है, जबकि प्रशासनिक खामियों से जुड़ी जनहित की खबरों या सीयूजी फोन का संज्ञान लेने के बजाय पत्रकारों पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है, जो व्यवस्था के एकतरफा और एकांगी संवाद को उजागर करता है।
इसी प्रशासनिक उपेक्षा व उत्पीड़न की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय राय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने, राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट तलब करने और पत्रकारों की सुरक्षा संबंधी ठोस सिफारिशें जारी करने की पुरजोर मांग की है। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के संरक्षक तुलाराम ठाकुर, जिला अध्यक्ष महिपाल सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ तारिक अज़ीम समेत अमरोहा के पत्रकारों ने कांग्रेस की इस सकारात्मक पहल को लोकतंत्र के लिए उम्मीद की किरण बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पत्रकारों की सामाजिक-स्वास्थ्य सुरक्षा और निष्पक्ष पत्रकारिता के अधिकारों की रक्षा के लिए इसी प्रकार आगे आना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर राज्य में पत्रकारों पर बढ़ती आपराधिक कार्रवाइयों की स्वतंत्र जांच और हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि जनहित के मुद्दों पर निर्भिक रिपोर्टिंग न हो पाने से लोकतांत्रिक जवाबदेही और नागरिक अधिकार प्रभावित होंगे। राय ने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में पत्रकारों के खिलाफ मुकदमों और पुलिस कार्रवाई की कई घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही। उन्होंने आयोग से 2020 से अब तक दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा, सरकार और डीजीपी से रिपोर्ट तलब करने तथा एडिटर्स गिल्ड,प्रेस क्लब,सीपीजे और पत्रकार संगठनों से राय लेकर सुरक्षा संबंधी अनुशंसाएं जारी करने की मांग की है@शांतनु/INN
