तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंगलवार, 4 अगस्त को हिरासत में लिया गया। मामला तंजावुर में हुई एक राजनीतिक रैली के दौरान दिए गए उनके कथित डबल मीनिंग बयान से जुड़ा है। मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा कर दिया जाए।
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकारी वकील के मुताबिक, मामला एक महिला की गरिमा और अस्मिता से जुड़ा होने के कारण जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक था। हालांकि, उन्हें न्यायिक हिरासत या रिमांड पर भेजने की मांग नहीं की गई।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि घटना तंजावुर जिले में हुई थी, इसलिए जांच के सिलसिले में उदयनिधि स्टालिन को वहां ले जाकर पूछताछ की जा रही है। कोर्ट ने सरकारी पक्ष की दलील सुनने के बाद कहा कि जांच के लिए जरूरी पूछताछ की जा सकती है, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें रिमांड पर भेजने की आवश्यकता नहीं है।
तंजावुर की रैली में बयान पर विवाद
पूरा विवाद 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली के दौरान शुरू हुआ। उदयनिधि स्टालिन मंच से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ की ओर से अभिनेत्री तृषा के नाम के नारे लगाए जाने लगे।
आरोप है कि इसी प्रतिक्रिया में उदयनिधि स्टालिन ने ऐसा बयान दिया, जिसे विपक्षी दलों ने डबल मीनिंग और महिला के सम्मान के खिलाफ बताया। बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने सफाई दी कि उनका संदर्भ केवल कावेरी नदी के पानी से था और उनके बयान का कोई गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
मामले को लेकर राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है और विपक्षी नेताओं ने उदयनिधि स्टालिन से स्पष्टीकरण तथा माफी की मांग उठाई है।
