नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों और उससे आम लोगों को होने वाली परेशानी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके चलते राजधानी की सामान्य व्यवस्था ठप नहीं होनी चाहिए।
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों की आवाजाही, ट्रैफिक और एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से यह भी सवाल किया कि प्रदर्शन स्थलों को शहर के बीचों-बीच ही क्यों संचालित होने दिया जाए।
अदालत ने साफ किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रही है। हालांकि, इस अधिकार के साथ आम नागरिकों की सुविधा और शहर की व्यवस्था का भी ध्यान रखना जरूरी है।
15 अगस्त को लेकर पहले से सुरक्षा व्यवस्था
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इलाके में निषेधाज्ञा भी लागू है।
मामले में ‘ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमिटी’ ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। संगठन ने दिल्ली पुलिस को दिए गए आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।
पुलिस को 8 अगस्त तक फैसला लेने का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित आवेदन पर नियमों के अनुसार फैसला करे। कोर्ट ने पुलिस को शनिवार, 8 अगस्त तक याचिकाकर्ता के आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने को कहा।
अदालत के इस निर्देश के बाद जनहित याचिका का निपटारा कर दिया गया। कोर्ट की टिप्पणी में साफ संकेत दिया गया कि प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके चलते राजधानी की यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
