अमरोहा, 24 सितंबर। उत्तराखंड के खानपुर से विधायक उमेश कुमार के अमरोहा जिले के हसनपुर स्थित फार्म हाउस पर हरियाणा निवासी 23 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के एक उपनिरीक्षक (दरोगा) व सिपाही तथा सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार कर बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गृह मंत्रालय की महिला अधिकारी के जांच के सिलसिले में पहुंचने की भ्रामक सूचना देकर फार्म हाउस के कमरे खुलवाए गए थे।

पुलिस सूत्रों और फार्म हाउस के केयरटेकर रामनिवास के बयानों के अनुसार, 22-23 सितंबर की रात एक दरोगा ने केयरटेकर को फोन कर बताया कि गृह मंत्रालय की एक महिला अधिकारी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ जांच के लिए आ रही हैं। केयरटेकर ने विधायक से बात कराने का अनुरोध किया तो दरोगा ने दावा किया कि उसकी विधायक से पहले ही बातचीत हो चुकी है। इसके आधार पर केयरटेकर ने कमरे खुलवा दिए और जांच के नाम पर पहुंचे आरोपी तीन अलग-अलग कमरों में ठहर गए। केयरटेकर के अनुसार, पांच लोगों के ठहरने के बाद वह परिसर से चला गया और मौके पर केवल चौकीदार मंगली उर्फ रुस्तम मौजूद था।

आरोप है कि उसी रात फार्म हाउस में ठहरी युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। घटना के बाद पीड़िता द्वारा फोन किए जाने पर पुलिस की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और पीड़िता के साथ वहां मौजूद आरोपियों को अपने साथ ले गईं। चौकीदार द्वारा फोन पर दी गई सूचना के बाद ही केयरटेकर को पूरे घटनाक्रम की जानकारी हो सकी।

मामले में पुलिस ने हसनपुर कोतवाली के उपनिरीक्षक संजय तोमर, अमरोहा पुलिस लाइन के सिपाही प्रमोद, सीआरपीएफ की 156वीं बटालियन (असम) के इंस्पेक्टर लालाराम यादव और 5वीं बटालियन (दिल्ली) के हेड कांस्टेबल मोहित को गिरफ्तार कर बुधवार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
विभागीय स्तर पर यूपी पुलिस के आरोपी दरोगा और सिपाही के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि सीआरपीएफ जवानों पर दंडात्मक कार्रवाई हेतु संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है।
केयरटेकर के बयानों के बाद अब पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कमरे खुलवाने के लिए फोन करने वाला दरोगा कौन था, उसने गृह मंत्रालय के नाम पर गलत सूचना क्यों दी और क्या उसे आने वालों की वास्तविक मंशा की पूर्व जानकारी थी। पुलिस इस बिंदु पर सभी डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) की गहनता से जांच कर रही है@MP SINGH/INN
