मुरादाबाद। कुपोषण के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में मुरादाबाद जिला अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित इस केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां चिकित्सकों की दिन-रात की समर्पित देखभाल के चलते गंभीर अति कुपोषित (सैम) बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ होने (रिकवरी रेट) का आंकड़ा जो वर्ष 2022 में 86 फीसदी था, वह इस साल जुलाई तक बढ़कर 95 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। बीते करीब साढ़े चार वर्षों में इस केंद्र ने 1,148 गंभीर अति कुपोषित बच्चों को मौत के मुंह से निकालकर नया जीवन दिया है। केंद्र की इस बेमिसाल सफलता और जरूरत को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देश पर अब यहां बेड की क्षमता 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है।
14 दिन के विशेष आहार से 95 फीसदी बच्चे पा रहे नया जीवन
जिला अस्पताल के इस केंद्र में अति कुपोषित बच्चों को नया जीवन देने के लिए एक तय और बेहद कड़ा डाइट प्रोटोकॉल लागू है। भर्ती होने वाले बच्चों को डाइटिशियन की निगरानी में एफ-75 और एफ-100 जैसी हाई-एनर्जी और हाई-प्रोटीन डाइट दी जाती है। इस डाइट में सूजी का हलवा, दूध में देसी घी, वेजिटेबल सूप, फलों का रस और मूंग दाल की खिचड़ी शामिल होती है। इस विशेष दिनचर्या का ही कमाल है कि औसतन 14 दिनों के भीतर 95 फीसदी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं और उनके वजन में 15 फीसदी तक का इजाफा हो जाता है। जो बच्चे 14 दिन में रिकवर नहीं हो पाते, उन्हें 28 दिन तक रोककर विशेष उपचार दिया जाता है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और 24 घंटे निगरानी
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की इस सफलता के पीछे डॉक्टरों और स्टाफ की एक मजबूत टीम खड़ी है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार के निर्देशन में इस केंद्र का संचालन हो रहा है। एनआरसी के डिस्ट्रिक्ट नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव और केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डॉ. द्युति गुप्ता बच्चों के इलाज की कमान संभाले हुए हैं। इसके अलावा अस्पताल में तैनात डीएनबी (पीजी) डॉक्टर भी सुबह-शाम बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की नियमित जांच करती हैं। बाल रोग विभाग में होने वाली डीएनबी की पढ़ाई के चलते यहां पीजी छात्र (डॉक्टर) भी चौबीसों घंटे बच्चों की निगरानी के लिए उपलब्ध रहते हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति को तुरंत संभाला जाता है। किसी भी बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे तुरंत अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में शिफ्ट करने की भी व्यवस्था है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी एनआरसी के विस्तार की रूपरेखा
कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इस सफलता को दोहराने की तैयारी है। जिले में फिलहाल जिला अस्पताल के अलावा ठाकुरद्वारा में एनआरसी संचालित है। जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है। ठाकुरद्वारा के केंद्र को 4 से बढ़ाकर 10 बेड का किया जा रहा है। इसके साथ ही कांठ और बिलारी ब्लॉक में भी 10-10 बेड के नए पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।

माताओं को आर्थिक मदद के साथ मिलती है ‘पोषण पोटली‘
इलाज के दौरान बच्चों के साथ रुकने वाली माताओं का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। अस्पताल की ओर से उन्हें दोनों समय का भोजन और नाश्ता बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। चूंकि मां 14 दिन अस्पताल में रहती है, इसलिए उसकी मजदूरी के नुकसान की भरपाई के तौर पर शासन की ओर से 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 1400 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं। छुट्टी के समय बच्चे को फिर से कुपोषण से बचाने के लिए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की विशेष पहल पर माताओं को एक ‘पोषण पोटली’ (डाइट किट) भी भेंट की जाती है। केंद्र में बच्चों के मानसिक विकास के लिए एक विशेष प्ले-एरिया भी बनाया गया है, जहां खिलौनों के बीच बच्चे खेलते हुए जल्द रिकवर होते हैं।
आंकड़ों की जुबानी, मुरादाबाद एनआरसी की प्रगति
केंद्र का क्योर रेट (स्वस्थ होने की दर) लगातार बेहतर हो रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 में 197 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें क्योर रेट 86 प्रतिशत रहा। वर्ष 2023 में 299 दाखिलों के साथ क्योर रेट 77 प्रतिशत रहा। वर्ष 2024 में 279 बच्चे भर्ती हुए और क्योर रेट 82 प्रतिशत रहा। वर्ष 2025 में 225 बच्चों के दाखिले पर क्योर रेट 86 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक 148 अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जा चुके हैं और क्योर रेट उछाल मारकर 90 प्रतिशत से ज्यादा के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो इस केंद्र की बढ़ती गुणवत्ता का प्रमाण है।
वर्जन
हमारा प्राथमिक लक्ष्य मुरादाबाद को कुपोषण मुक्त बनाना और हर अति कुपोषित बच्चे को स्वस्थ जीवन देना है। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में हमने 20 बेड की व्यवस्था पूरी कर संचालन शुरू कर दिया है। बच्चों के लिए विशेष डाइट के साथ-साथ उनके मानसिक विकास के लिए प्ले-एरिया भी बहुत कारगर साबित हो रहा है।”
– डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
