वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में पारित प्रस्ताव के बाद देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के इस फैसले पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने देश विरोधी फैसला लिया है। उन्होंने लोगों से कांग्रेस के फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को अलग करने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि इसी फैसले ने देश के विभाजन की जमीन तैयार की। शाह ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया था और कांग्रेस का मौजूदा रुख उनके योगदान का अपमान है।
दरअसल, कांग्रेस ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि पार्टी वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों को ही स्वीकार करती है। कांग्रेस का कहना है कि आजादी से पहले महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल समेत कई प्रमुख नेताओं के विचारों के अनुरूप यही व्यवस्था तय की गई थी। पार्टी ने बीजेपी पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम् देश के गौरव और भारत माता की वंदना का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी वोट बैंक की राजनीति से बाहर नहीं निकल पाई है।
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले से पार्टी का रुख साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि संसद से पारित व्यवस्था को नजरअंदाज करना देश और संविधान की व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर और तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी का यह फैसला अब उसकी नीति का हिस्सा बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय भावनाओं से समझौता कर रही है।
कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने बीजेपी और आरएसएस पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी की लड़ाई के दौरान आरएसएस की भूमिका क्या थी। खेड़ा ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का रुख ऐतिहासिक नेताओं के फैसलों के अनुरूप है और बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल रही है।
इस विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। संगठन के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि वंदे मातरम् के पूर्ण स्वरूप में भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदर्भ मौजूद हैं।
गौरतलब है कि संसद में वंदे मातरम् को लेकर चर्चा के बाद सरकार की ओर से इससे जुड़े प्रावधानों को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। अब यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राष्ट्रवाद, इतिहास और तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर बड़ी बहस का रूप लेता दिख रहा है।
