दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और 2019 की जामिया हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इन मामलों की जांच के लिए अलग से SIT गठित करने की मांग को खारिज कर दिया है।
याचिकाओं में दंगों और जामिया हिंसा की जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। साथ ही, कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर कुछ नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और कथित लापरवाही के लिए पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई थी। हाई कोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।
इन याचिकाओं में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के संदर्भ में कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग भी शामिल थी।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में CAA को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
वहीं, दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आसपास CAA विरोधी प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। इस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल उठाए गए थे।
