कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है और यह फैसला अमेरिकी कंपनियों के दबाव का नतीजा हो सकता है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि 2,000 रुपये से ज्यादा के कारोबारी UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लेनदेन संख्या में भले ही कम हों, लेकिन UPI के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी काफी बड़ी है।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो व्यापारियों पर लगने वाला चार्ज आखिरकार किसकी जेब से जाएगा। राहुल गांधी का तर्क है कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को सामान और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं, जिसका असर अंततः ग्राहकों पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR व्यवस्था में बदलाव की मांग करती रही हैं। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाते हुए इसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जोड़कर निशाना साधा।
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी UPI शुल्क को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बाद जारी अधिसूचना में 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर शुल्क रोकने की बात है, लेकिन इससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इसी प्रावधान के जरिए भविष्य में बड़े UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता तैयार कर रही है। हालांकि, इस पूरे मामले में सरकार की ओर से शुल्क लगाए जाने को लेकर अंतिम निर्णय और स्पष्ट नीति की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
