सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन भाषा नीति को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए सुझाव दिया है कि कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा की व्यवस्था अगले शैक्षणिक वर्ष से शुरू की जाए। कोर्ट का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को नई भाषा सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ को बताया कि बोर्ड इस सुझाव पर विचार करेगा।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने यह भी कहा कि अगर वर्तमान में कक्षा 6 में पढ़ रहे विद्यार्थी इसी शैक्षणिक वर्ष से तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी अनुमति दी जा सकती है।
इससे पहले केंद्र सरकार और CBSE ने कोर्ट को बताया था कि कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की नीति को लागू करने के संबंध में सुझावों पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाओं को शामिल किया जाना है।
क्या है तीन भाषा नीति?
CBSE के सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी जरूरी हैं। हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया जैसी भाषाएं भारतीय भाषाओं की सूची में शामिल हैं।
वहीं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाओं को गैर-भारतीय भाषाओं की श्रेणी में रखा गया है।
कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए दो भारतीय भाषाओं को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है, जबकि कक्षा 7, 8 और 9 में पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे विद्यार्थियों को कुछ छूट देने की व्यवस्था की गई है।
इस नीति को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को केंद्र, CBSE और NCERT से जवाब मांगा था।
