अमरोहा , 25 सितंबर। उत्तराखंड के विधायक के फार्म हाउस में हरियाणा की युवती के साथ हुए गैंगरेप और पुलिसकर्मियों की संदिग्ध संलिप्तता के खुलासे के बाद अब इस मामले ने एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। हसनपुर सर्किल के रझोहा क्षेत्र के फार्म हाउसों में जारी असामाजिक गतिविधियों, देर रात काले शीशे की लग्जरी गाड़ियों की आवाजाही और कथित कोडवर्ड्स के जरिए संचालित वीआईपी नेटवर्क को लेकर स्थानीय किसानों व आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी विरोध के तहत किसानों ने अय्याशी के अड्डे के रूप में जनपद में जगह-जगह बनाए गए तथाकथित फार्म हाउसों का हसनपुर सर्किल के कूबी गांव पुतला दहन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने तथा अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

किसान संगठनों का मानना है कि यदि फार्म हाउसों की आड़ में पनप रहे इस नेटवर्क पर तत्काल कठोर अंकुश नहीं लगाया गया, तो उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी (वनंतरा फार्म हाउस) कांड जैसी दुखद और शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव हो जाएगा। इसी गंभीर आशंका के मद्देनजर भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और अमरोहा के पुलिस अधीक्षक को भेजे गए प्रपत्रों के माध्यम से उच्चस्तरीय हस्तक्षेप व न्यायिक जांच की मांग की है।

किसान नेता नरेश चौधरी का कहना है कि यह मुद्दा अब केवल किसी एक घटना तक सीमित न रहकर तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के जनसरोकारों से जुड़ चुका है। क्षेत्र के विभिन्न फार्म हाउस ‘विशेष सेवाओं’ और अवांछित गतिविधियों का अड्डा बनते जा रहे हैं, जहाँ रात के अंधेरे में संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। पूर्व में भी इस संबंध में स्थानीय पुलिस प्रशासन से वार्ता की गई थी, लेकिन प्रभावी निगरानी तंत्र के अभाव में अपराधियों के हौसले बुलंद होते गए।

प्रशासन से की गई प्रमुख मांगों में यह बात विशेष रूप से शामिल है कि हसनपुर सर्किल के रझोहा से संबंधित फार्म हाउस के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर को तुरंत पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा अपने कब्जे में लिया जाए, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। इसके साथ ही, जांच के दौरान जो भी फार्म हाउस अवैध रूप से निर्मित पाए जाएं या जहां भी असामाजिक गतिविधियां संचालित हो रही हों, उन पर बिना किसी देरी के कानूनी शिकंजा कसते हुए बुलडोजर कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी फार्म हाउसों के लिए क्वीक रिस्पांस व एक स्थायी पुलिस निगरानी व्यवस्था स्थापित करना अनिवार्य बताया गया है।
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कदम नहीं उठाए, तो भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) हरियाणा और उत्तराखंड की अपनी प्रांतीय इकाइयों को एकजुट कर सड़कों पर उतरने और व्यापक जनांदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा@MP SINGH/INN
