संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA के तहत की गई प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द कर दी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसकी हिरासत को बरकरार रखा गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में दर्ज कथित कबूलनामे को NSA के तहत एहतियाती हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
मुल्ला अफरोज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि उसके खिलाफ कार्रवाई पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे पर आधारित थी। वहीं, यूपी सरकार ने अदालत के सामने आशंका जताई थी कि वह भविष्य में हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
यह मामला 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। अफरोज को मामले में कथित मुख्य आरोपी बताया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में 13 अक्टूबर 2025 को NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को सुनवाई के दौरान ही पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे की कानूनी प्रासंगिकता को लेकर सवाल उठाए थे।
