उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने FIR में आरोपी का नाम दर्ज किए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि अगर पुलिस इसी तरह काम करती रही तो सभी आपराधिक मामलों की जांच CBI को सौंपने और यूपी पुलिस को भंग करने पर विचार करना पड़ सकता है।
इस टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा। वहीं, गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस का बचाव करते हुए बिना किसी का नाम लिए विपक्ष और आलोचकों पर पलटवार किया।
‘बिना सुरक्षा के हर व्यक्ति बेबस’
लखनऊ के लोक भवन में आयोजित पुलिस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना आसान होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए सुरक्षित माहौल में चिंतन करना अलग बात है, लेकिन सुरक्षा के बिना परिस्थितियां बदल जाती हैं।
सीएम योगी ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद को कितना भी बड़ा क्यों न समझता हो, अगर उसे सुरक्षा के घेरे से बाहर कर दिया जाए तो उसे ‘भीगी बिल्ली’ बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ के सिद्धांत के साथ काम कर रही है।
2017 से पहले की कानून व्यवस्था का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राजनीतिक नेतृत्व की ‘रीढ़’ ही कमजोर हो तो कानून व्यवस्था को मजबूत करना मुश्किल होता है।
योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उस दौर में माफिया और अपराधियों का प्रभाव इतना था कि सत्ता में बैठे लोग उनके सामने झुकते थे। उनके मुताबिक, 2017 के बाद प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और पहचान में बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस के जवानों को अपनी पहचान छिपाने की जरूरत नहीं पड़ती और प्रदेश में सात पुलिस कमिश्नरेट भी प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं।
FIR में आरोपी का नाम बाद में जोड़े जाने पर भड़का मामला
पूरे विवाद की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई से हुई। मामला ऐसी FIR से जुड़ा था, जिसमें घटनास्थल पर कथित तौर पर पकड़े गए व्यक्ति का नाम शुरुआत में दर्ज नहीं किया गया और FIR में आरोपी को ‘अज्ञात’ बताया गया। बाद में आरोपी का नाम FIR में जोड़ा गया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल उठाया कि जब व्यक्ति को मौके पर ही पकड़ लिया गया था तो FIR में उसे अज्ञात क्यों बताया गया। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से लोगों का पुलिस पर भरोसा कैसे कायम रहेगा। संबंधित पुलिस अधिकारी को भी अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया है।
इसी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि यूपी पुलिस की जांच इसी तरह चलती रही तो CBI को सभी आपराधिक मामलों की जांच सौंपने पर विचार किया जा सकता है और पुलिस बल को भंग करने की बात भी कही।
पूर्व पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह की किताब का विमोचन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह की पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने प्रकाश सिंह के पुलिस सेवा के दौरान किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए अपने छात्र जीवन का एक प्रसंग साझा किया।
सीएम ने कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में आतंकवाद का प्रभाव था और लोगों के बीच डर का माहौल था। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह जैसे अधिकारियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कड़े फैसले लिए, जिससे क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिली।
योगी ने कहा कि प्रकाश सिंह ने उत्तर प्रदेश के अलावा असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्यों में भी सेवाएं दीं और उनका अनुभव देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
