नई दिल्ली। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में सरकार ने GST व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और कारोबार के अनुकूल बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य फोकस GST दरों में बदलाव के बजाय रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), गिरफ्तारी के अधिकार, पंजीकरण और टैक्स विवादों को आसान बनाने पर रहा।
बैठक को GST के अगले चरण यानी GST 2.0 के प्रक्रिया सुधारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, कुछ बदलावों को लागू करने के लिए संबंधित कानून, नियम और अधिसूचनाओं में संशोधन जरूरी होगा।
- GST रिफंड की प्रक्रिया होगी तेज
बैठक में रिफंड प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रिफंड आवेदन के 10 दिन के भीतर acknowledgement और उसके बाद करीब सात दिन में भुगतान की प्रक्रिया का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह पात्र मामलों में पूरा चक्र लगभग 17 दिन तक सीमित करने की कोशिश है।
रिस्क आधारित व्यवस्था के तहत पात्र दावों का 90 फीसदी तक रिफंड पहले जारी करने की व्यवस्था कारोबारियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे निर्यातकों और उन उद्योगों को फायदा होगा जिनका पैसा लंबे समय तक टैक्स क्रेडिट और रिफंड में फंसा रहता है।
- GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति पर बड़ा बदलाव
GST कानून के तहत अधिकारियों को मिलने वाली गिरफ्तारी की शक्तियों को सीमित करने का फैसला कारोबार जगत के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बिना न्यायिक अनुमति गिरफ्तारी की मौजूदा शक्ति को खत्म करने की दिशा में फैसला हुआ है।
इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स चोरी के गंभीर मामलों और सामान्य अनुपालन संबंधी गलतियों के बीच स्पष्ट अंतर करना है। इससे व्यापारियों में कार्रवाई और गिरफ्तारी को लेकर बनी आशंका कम होने की उम्मीद है।
- आपराधिक कार्रवाई की सीमा 1 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़
GST से जुड़े मामलों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का निर्णय कारोबारियों के लिए अहम माना जा रहा है। इसका मतलब है कि अपेक्षाकृत छोटे टैक्स विवादों में आपराधिक कार्रवाई का जोखिम कम होगा।
सरकार का व्यापक उद्देश्य GST व्यवस्था में decriminalisation को बढ़ावा देना और जानबूझकर की गई बड़ी टैक्स चोरी तथा सामान्य अनुपालन संबंधी चूक के बीच अंतर करना है।
- ईमानदार खरीदारों का ITC सुरक्षित करने की दिशा में कदम
GST व्यवस्था में लंबे समय से कारोबारियों की बड़ी शिकायत रही है कि यदि सप्लायर ने टैक्स जमा नहीं किया तो कई बार खरीदार को भी Input Tax Credit यानी ITC के नुकसान का सामना करना पड़ता है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे ईमानदार और वास्तविक खरीदारों को संरक्षण देना है, जिन्होंने वास्तविक खरीद की, टैक्स का भुगतान किया और निर्धारित शर्तों का पालन किया है। ऐसी स्थिति में गलती करने वाले सप्लायर के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर होगा, न कि हर मामले में खरीदार का ITC रोकने पर।
हालांकि, फर्जी बिलिंग, मिलीभगत या काल्पनिक लेनदेन जैसे मामलों में यह सुरक्षा लागू नहीं होगी। अंतिम नियमों में यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि ‘ईमानदार खरीदार’ की पहचान किस आधार पर होगी।
- GST रजिस्ट्रेशन में तेजी, फर्जी कारोबार पर शिकंजा
GST पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के साथ-साथ फर्जी कंपनियों और बोगस रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
इसका उद्देश्य वास्तविक कारोबारियों को तेज रजिस्ट्रेशन सुविधा देना और फर्जी पहचान के आधार पर बनाए जाने वाले GST खातों पर नियंत्रण मजबूत करना है।
MSME और छोटे कारोबारियों को क्या फायदा?
GST के इन सुधारों का सबसे सीधा असर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ सकता है। तेज रिफंड से कारोबार की वर्किंग कैपिटल जरूरत कम होगी, आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ने से छोटे टैक्स विवादों में राहत मिलेगी और ITC से जुड़े विवाद कम होने पर कारोबारियों का पैसा लंबे समय तक अटकने से बच सकता है।
साथ ही, रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने से छोटे व्यापारियों के लिए अनुपालन की लागत और कागजी कार्रवाई कम करने की कोशिश की जा रही है।
GST दरों में इस बैठक में बड़ा बदलाव नहीं
56वीं GST काउंसिल बैठक में व्यापक स्तर पर GST दरों में बदलाव किया गया था। इसके विपरीत 57वीं बैठक का मुख्य जोर टैक्स रेट बदलने के बजाय GST की पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने पर रहा। रजिस्ट्रेशन, रिफंड, ITC, प्रवर्तन और विवाद समाधान जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।
कारोबारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
GST लागू होने के बाद से कारोबारियों की प्रमुख शिकायतों में रिफंड में देरी, ITC अटकना, सप्लायर की गलती का बोझ खरीदार पर आना और टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता शामिल रही है। प्रस्तावित सुधार इन समस्याओं को सीधे संबोधित करने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो इससे कारोबार में नकदी का प्रवाह बेहतर हो सकता है, टैक्स विवाद घट सकते हैं और सरकार तथा करदाताओं के बीच भरोसा बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, 57वीं GST काउंसिल बैठक को GST के अगले चरण में ‘कम जटिलता, तेज रिफंड, सुरक्षित ITC और कम आपराधिक कार्रवाई’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम प्रभाव संबंधित कानूनों में संशोधन और नए नियमों की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
